Shimla: दहेज उत्पीड़न मामले में ससुर की जमानत याचिका HC से खारिज, सिख महिला पर धार्मिक आस्था के खिलाफ दबाव बनाने के आरोप

Khabron wala 

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या से जुड़े एक मामले में आरोपी ससुर की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. हिमाचल हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश कैंथला ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया. याचिकाकर्ता का पक्ष था कि मुकदमे की सुनवाई में देरी हो रही है और उनके त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है. लेकिन अदालत ने पाया कि सुनवाई को जानबूझकर नहीं टाला जा रहा है. ऐसे में अदालत में आरोपी ससुर की जमानती अपील को फिलहाल नकार दिया है.

HC ने अपने आदेश में क्या कहा ?

जस्टिस राकेश कैंथला की बेंच ने कहा कि, याचिकाकर्ता का यह तर्क ठीक नहीं है कि उसके जल्द सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन किया जा रहा है. अदालत ने पाया कि मामले में अभी गवाहों को पूरी तरह अदालत के सामने पेश नहीं हुए हैं. ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि जानबूझकर सुनवाई को टाला जा रहा था. अदालत ने माना कि केवल एक तारीख पर सभी गवाहों के बयान दर्ज न होने से सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जा सकता. लिहाजा आरोपी याचिकाकर्ता फिलहाल इस स्टेज पर जमानत का हकदार नहीं है. हालांकि भविष्य में अगर सुनवाई आगे नहीं बढ़ती है तो याचिकाकर्ता पुनः न्यायालय का रुख कर सकता है.

याचिकाकर्ता ने अदालत में दावा किया कि, उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है. नियमित जमानत की अपील करते हुए याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि मुकदमे की सुनवाई में देरी हो रही है और उनके त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है. याचिकाकर्ता का आरोप था कि ट्रायल कोर्ट में चल रहे मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है. जिसके ख़िलाफ़ याचिकाकर्ता ने हिमाचल हाई कोर्ट में नियमित ज़मानत के लिए अपील की.

क्या है पूरा मामला?

21 अप्रैल 2025 को जिला सोलन के नालागढ़ थाना में शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया. इस मामले में एक परिवार के कई सदस्यों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ. इसके बाद पुलिस ने मामले में आरोपी पति, ससुर के साथ साथ सास, बहन और चाचा को गिरफ्तार किया गया. हालांकि आरोपी चाचा और एक अन्य कोर्ट से जमानत मिल गई. हालांकि, आरोपी ससुर 21 अप्रैल 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं.

परिवार पर धार्मिक आस्था के विरुद्ध दबाव बनाने के आरोप

पीड़िता का विवाह 6 नवंबर 2024 को हुआ था लेकिन शादी के 5 महीने बाद ही 23 अप्रैल 2025 को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. FIR में स्पष्ट आरोप लगाए गए हैं कि पीड़िता को कम दहेज लाने के कारण लगातार प्रताड़ित किया जाता था और उसे कार न लाने पर पीटा गया. इसके अलावा आरोप है कि पीड़िता सिख धर्म से थी, लेकिन परिवार उसकी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत गैर-शाकाहारी भोजन बनाने और नाक में नथ पहनने के लिए मजबूर किया जाता था. शिकायतकर्ता के अनुसार जब वह और उसके पिता नेहा के ससुराल पहुंचे तो नेहा बिस्तर पर बेहोश पड़ी थी. उन्होंने उसे अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन आरोपी पति संजीव कुमार, ससुर करम चंद और सास तेज कौर ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया. अदालत ने माना कि ये आरोप प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता की मामले में संलिप्तता दर्शाते हैं.

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