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सिरमौर: नौहराधार को-ऑप्रेटिव बैंक घोटाले में बड़ी कार्रवाई, आरोपी सहायक प्रबंधक सेवा से बर्खास्त

Khabron wala 

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में नौहराधार स्थित सहकारी बैंक में सामने आए करोड़ों रुपए के बहुचर्चित घोटाले में बैंक प्रबंधन ने बड़ी कार्रवाई की है। इस वित्तीय अनियमितता में संलिप्त मुख्य आरोपी सहायक प्रबंधक को स्थायी रूप से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही, घोटाले की राशि की रिकवरी भी मुख्य आरोपी से ही करने के आदेश जारी किए गए हैं।

13 में से 7 अधिकारी-कर्मचारी पूर्ण रूप से पाए गए दोषी

बैंक के प्रबंध निदेशक विनय सिंह ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरे मामले में 13 अधिकारियों व कर्मचारियों की संलिप्तता और लापरवाही सामने आई थी। विभागीय जांच के बाद इनमें से 7 लोगों को पूर्ण रूप से दोषी पाया गया है। मुख्य आरोपी सहायक प्रबंधक को बर्खास्त करने के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अन्य कर्मचारियों पर भी गाज गिरी है। बैंक प्रबंधन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए किसी को डिमोट किया है तो किसी का अन्य स्थानों पर तबादला कर दिया है।

98 प्रतिशत उपभोक्ताओं की राशि लौटाई गई

इस घोटाले के कारण अपनी गाढ़ी कमाई खोने के डर में जी रहे उपभोक्ताओं के लिए भी राहत की खबर है। बैंक प्रबंधन के अनुसार, घोटाले से प्रभावित लगभग 98 प्रतिशत उपभोक्ताओं की राशि का भुगतान उनके खातों में कर दिया गया है। शेष बचे 2 प्रतिशत उपभोक्ताओं के पैसों का भुगतान भी शीघ्र ही कर दिया जाएगा।

स्थानीय लोगों व व्यापार मंडल ने की कार्रवाई की सराहना

बैंक द्वारा की गई इस सख्त कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने स्वागत किया है। स्थानीय उपभोक्ता इंद्रपाल चौहान, नरेंद्र सिंह, व्यापार मंडल के प्रधान अशोक ठाकुर और पूर्व प्रधान रविंद्र चौहान ने कहा कि इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि वित्तीय अनियमितताओं को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कड़ी कार्रवाई से बैंक की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास बैंक पर फिर से मजबूत होगा।

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि कि 13 अगस्त, 2024 को नौहराधार सहकारी बैंक में करोड़ों रुपए के गबन का यह मामला सार्वजनिक हुआ था। खबर फैलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया था और बड़ी संख्या में लोग अपने खातों की जांच करवाने बैंक पहुंचने लगे थे। मामला मीडिया में उछलने के बाद शिमला स्थित बैंक मुख्यालय ने तुरंत संज्ञान लिया और अधिकारियों की एक विशेष ऑडिट टीम नौहराधार भेजी। टीम ने कई दिनों तक बैंक के दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स की गहन जांच की। इसके बाद प्राथमिक जांच के आधार पर आरोपी सहायक प्रबंधक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर शिमला मुख्यालय अटैच कर दिया गया था और विभागीय जांच शुरू की गई थी, जिसका अंतिम फैसला अब बर्खास्तगी के रूप में आया है।

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