श्रीगुरू नानक देव जी के 551 वें प्रकाशाेत्सव का उत्साह पूरे शहर के गुरूद्वाराें में देखने काे मिला। हर कोई इस दिन की खुशी मना रहा था। संगत का कहना था कि अाज जब हम इतने सालाें बाद गुरू जी का 551 वां प्रकाशाेत्सव इतने उत्साह अाैर खुशी के साथ मना रहे हैं ताे जिन लाेगाें ने उस समय गुरू जी काे देखा हाेगा, उनमें कितना उत्साह अाैर खुशी हाेगी।

गुरुद्वारा साहिब संतोखगढ़ पुरूवाला में 551 वें प्रकाशाेत्सव काे यादगार बनाने के लिए विशेष केक मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा

इसके अलावा शहर के अलग-अलग गुरुद्वारा साहिबों में बड़ी तादाद में श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचे। श्रद्वालुअों ने पूरी श्रद्धा भाव से सेवा की और लंगर बर्ताया। गुरु घर के प्रसाद को भी श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव से ग्रहण किया
गुरु नानक का जन्म कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 1526 ई में हुआ था। यही कारण है हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा को प्रकाश पर्ब के रूप में मनाया जाता है।गुरु नानक देव जी सिर्फ एक संत नहीं बल्कि, दार्शनिक, समाज सुधारक, चिंतक, कवि और देश से प्यार करने वाले थे। कहा जाता है कि बचपन से ही नानक साहिब का मन संसारिक कामों में नहीं लगता था। आठ साल की आयु में ही उनका स्कूल भी छूट गया था। एक बालक के रूप में भगवान की ओर ज्यादा लगाव होने से लोग इन्हें दिव्य पुरुष के रूप में मानने लगे थे।











