सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट में शुगर फास्टिंग 360, निजी लैब में 194; मरीज और परिजन असमंजस में

सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट में शुगर फास्टिंग 360, निजी लैब में 194; मरीज और परिजन असमंजस में

पांवटा साहिब में एक महिला की ब्लड शुगर जांच को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी अस्पताल से जारी रिपोर्ट में फास्टिंग ब्लड शुगर 360 mg/dL दर्ज की गई है, जबकि निजी लैब की रिपोर्ट में यही स्तर 194 mg/dL बताया गया है। दोनों रिपोर्टों में भारी अंतर सामने आने से मरीज और उसके परिजन चिंता में हैं।

चिकित्सकीय मानकों के अनुसार फास्टिंग ब्लड शुगर 70 से 110 mg/dL के बीच सामान्य मानी जाती है। ऐसे में 194 mg/dL और 360 mg/dL दोनों ही स्तर सामान्य से काफी अधिक हैं, लेकिन दोनों परिणामों के बीच का बड़ा अंतर कई सवाल खड़े कर रहा है।

परिजनों का कहना है कि जब एक ही मरीज की रिपोर्ट में दो अलग-अलग संस्थानों से इतने भिन्न परिणाम आए हैं, तो आखिर सही रिपोर्ट किसे माना जाए। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सैंपल लेने का समय, जांच की पद्धति, मशीनों की गुणवत्ता या अन्य तकनीकी कारणों से परिणामों में अंतर आ सकता है, लेकिन ऐसे मामलों में पुनः जांच आवश्यक होती है।

मामले ने यह बहस भी छेड़ दी है कि मरीजों को उपचार के लिए किस रिपोर्ट पर भरोसा करना चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि मरीज किसी मान्यता प्राप्त केंद्र पर दोबारा जांच करवाए और HbA1c टेस्ट भी कराए, जिससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट सही है या निजी लैब की? हालांकि एक बात स्पष्ट है कि दोनों रिपोर्टों के अनुसार मरीज का ब्लड शुगर स्तर सामान्य सीमा से काफी अधिक है, जो चिकित्सकीय परामर्श की मांग करता है।

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