औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब के एक उद्योग द्वारा जमीन खरीद में धारा 118 के उल्लंघन के मामले को लेकर विजिलेंस जांच शुरू हो गई है। वर्ष 1998-99 में कंपनी प्रबंधन ने कालाअंब में 37.86 बीघा को स्थानीय लोगों से खरीदा गया था। इस जमीन के पूर्व मालिक फकीरचंद व अन्य लोगों का आरोप है कि कंपनी के निदेशक ने राजस्व प्रशासन की आंखों में धूल झोंकते हुए बिना उद्योग स्थापित किए ही यह जमीन लाखों में खरीद कर करोड़ों में बेच डाली।
फकीरचंद का आरोप है कि कथित कंपनी के मालिक का मुख्य उद्देश्य उद्योग स्थापित करना नहीं था, बल्कि सस्ते में जमीन खरीद कर उसको करोड़ों के लाभ में बेचना था। जिसमें वह सफल भी रहा है। जमीन के पूर्व मलिकों का आरोप है कि ना तो वर्ष 2008 तक इस जमीन पर उद्योग के नाम पर एक ईट तक इस जगह पर नहीं लगाई गई थी। जबकि नियमानुसार 1998 से 2008 तक जमीन पर उद्योग ना लगाने की एवज में धारा 118 के तहत यह जमीन सरकार में निहित होनी चाहिए थी। देखना अब यह भी है कि विजिलेंस इंक्वायरी के बाद जो इस पूरे प्रकरण पर किस तरह से परते खुलती है। उसमें क्या पुर्व भूमि मालिकों को न्याय मिलता है या नही। इस प्रकरण में जमीन विक्रेताओं का पैसा भी अभी पूरा नहीं मिल पाया है। उधर डीएसपी विजिलेंस तरनजीत सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में विजिलेंस इंक्वायरी चल रही है। इंक्वायरी पूर्ण होने से पहले कुछ भी बताया नहीं जा सकता है।












