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केरल के वायनाड में कुदरत के कहर ने हिमाचल प्रदेश के एक परिवार को जिंदगी भर का कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है। वायनाड में हुए भीषण भूस्खलन में लापता चल रहे कांगड़ा जिले के फतेहपुर उपमंडल निवासी इंजीनियर विक्रम राणा अब इस दुनिया में नहीं रहे। छ: दिन के दर्दनाक इंतजार के बाद मलबे से विक्रम का शव बरामद हुआ। इस खबर के आते ही पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया है।
जानकारी के मुताबिक, फतेहपुर उपमंडल की ग्राम पंचायत टकोली घिरथा के निवासी विक्रम राणा (50) पुत्र रंजीत सिंह डीबीएल कंपनी में बतौर इंजीनियर कार्यरत थे और काम के सिलसिले में वायनाड में मौजूद थे। बताया जा रहा है कि 7 जुलाई (मंगलवार) की सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर उनका अपने परिवार से आखिरी बार फोन पर संपर्क हुआ था। इसके बाद वायनाड में भयावह भूस्खलन हुआ, जिसके बाद से विक्रम का मोबाइल बंद हो गया और वे लापता हो गए थे, तभी से आपदा प्रबंधन और सेना की टीमें उनकी खोजबीन में जुटी हुई थीं। पुलिस ने बताया कि नदी के किनारे चलाए जा रहे तलाशी अभियान के दौरान रविवार सुबह करीब 11.30 बजे मीनाचिल पुल से लगभग 350 मीटर नीचे की ओर शव बरामद किया गया। इसके साथ ही भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। इस हादसे के बाद राणा आखिरी ऐसे व्यक्ति थे, जिनके लापता होने की सूचना थी। यह भूस्खलन वायनाड और कोझिकोड जिलों को जोड़ने के लिए प्रस्तावित अनाक्कोम्पोयिल-मेप्पाडी सुरंग परियोजना स्थल पर हुआ था।
पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेजा जाएगा। आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही मृतक की पहचान की पुष्टि की जाएगी। हादसे के बाद, पिछले पांच दिनों से चलाए जा रहे तलाशी अभियान के बावजूद राणा का पता नहीं चल सका था, जिसके बाद रविवार को एक व्यापक अभियान शुरू किया गया। इस अभियान में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, विशेष अभियान समूह, दमकल सेवा, त्वरित प्रतिक्रिया दल, वन विभाग के कर्मी और युवा स्वयंसेवी संगठन शामिल थे।










