शहर से महज कुछ ही किलोमीटर दूर कुंभिगढ़ गांव के जंगल में बन रही सुरंग के पता चलने पर पुलिस के द्वारा शिमला से फॉरेंसिक टीम को जांच के लिए बुलाया गया था। रविवार को फॉरेंसिक टीम पांवटा साहिब पहुंची। विभाग के निदेशक डॉक्टर अरुण शर्मा की अगुवाई में टीम ने सबूत इकट्ठे किये। शुरुआती जांच में पता चला है कि सुरंग का अधिकतर हिस्सा पहले बन चुका था। भीतर कुछ हिस्सों में नई खुदाई भी की गई है। सुरंग के मुहाने को भी ताजा ताजा खुदाई हुई है।
सुरंग खोदने का काम कौन लोग कर रहे थे और उनका उद्देश्य क्या था इस मामले में हालांकि अभी कोई पता नहीं चल पाया है लेकिन प्रारंभिक जांच में फॉरेंसिक विशेषज्ञों को लग रहा है कि जानवरों को पकड़ने के लिए यह व्यवस्था की जा रही थी। यदि जानवरों को पकड़ने के लिए इस तरह की सुरंग खोदी गई थी तो यह और भी यह बेहद गंभीर मामला है। आरक्षित वन क्षेत्र में इस तरह की गतिविधि पर रोक क्यों नहीं लगाई और लगभग लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके जंगली जानवरों को इस तरीके से मारने की छूट कैसे दी जा रही है? इस गैरकानूनी काम को कौन अंजाम दे रहा है? इन गंभीर सवालों के जवाब अप पुलिस को ढूंढने होंगे।
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी फॉरेंसिक जांच गंभीर सवाल उठा रही है सुरंग पुरानी है तो वन विभाग के कर्मचारियों इसकी सुध क्यों नहीं ली ? जानवरों के शिकार के लिए सुरंग बनाई जा रही है तो कई विभाग के लोग भी इसमें सम्मिलित तो नहीं ? इन सब सवालो के जवाब अब पुलिस को तलाशने हैं उधर पंचायत की वार्ड नंबर सुनीता त्यागी ने त्वरित जांच के लिए पुलिस प्रशासन, फोरेंसिक विभाग और मीडिया का धन्यबाद किया।












