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डॉक्टर बिंदल की बेनामी संपत्तियों तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम , सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

हिमाचल प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजीव बिंदल की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ गई हैं। 22 साल पुराना मामला सुप्रीम कोर्ट में खुल गया है। नाहन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए अनिल कुमार ने बताया कि वह लंबे समय से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। अब वह नाहन के विधायक ने जो बेनामी संपत्तियां तथा सोलन नगर परिषद के अध्यक्ष रहते हुए भ्रष्टाचार करके जो भर्तियां की थी उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। जिस पर वर्चुअल माध्यम से वीरवार को पहले सुनवाई हुई है।

सोलन की जिला अदालत व हाइकोर्ट से मामला रद्द होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में याचिका दाखिल की गई हैं। याचिका पर गुरुवार को हुई वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सरकार को नोटिस जारी किया गया है। बता दें कि याचिका नाहन के अनिल कुमार के द्वारा दायर की गई थी। जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार समेत 35 लोगों को नोटिस जारी किया है और 4 हफ्ते में जबाव मांगा गया है।

राज्य सरकार ने बीते साल बिंदल के खिलाफ इस केस को वापस ले लिया था और इसके बाद मामले को कोर्ट ने भी खारिज कर दिया था। इसके साथ ही जानकारी यह भी मिली है कि अपीलकर्ता बेनामी संपत्तियों को लेकर भी जल्द एक बड़ा खुलासा कर सकता है। यही नहीं इसके अलावा भाजपा के एक दिग्गज नेता ने भी इस मामले को लेकर बेनामी संपत्तियों के सबूत जुटाने में बड़ी सहायता की है।

अब कहा जा सकता है कि सरकार ने डॉ. बिंदल से कन्नी काटी है अब धीरे-धीरे यही सरकार कहीं बिंदल के खिलाफ शिकंजा ना कस दे। गौरतलब हो कि वर्ष 1998 से 2000 के दौरान सोलन नगर परिषद के अध्यक्ष थे । उनके अध्यक्ष पद पर रहते हुए सोलन कमेटी में करीब 24 भर्तियां की गई थी। सोलन में एक शिकायतकर्ता के द्वारा यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने नियम दरकिनार कर चहेतों को नौकरी पर रखा है ।भाजपा के बाद कांग्रेस जब सत्ता में आई, तो इस मामले पर जांच बिठाई गई थी। कांग्रेस ने बिंदल के खिलाफ विजिलेंस में केस दर्ज करवाया। शुरूआत में राजीव बिंदल समेत 27 लोगों को आरोपी बनाया गया था। ये मामला सोलन की अदालत में चल रहा था। जनवरी 2019 में सरकार ने ये मामला वापस ले लिया था।

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