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हिमाचल: अप्रैल में लौटी दिसम्बर वाली ठंड! बर्फबारी और ओलावृष्टि से कांपा प्रदेश, जानें कब तक जारी रहेगा अलर्ट

Khabron wala

हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है और अप्रैल के महीने में लोगों को दिसम्बर जैसी ठंड का अहसास होने लगा है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के चलते प्रदेश की ऊंची चोटियों पर जहां बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है, वहीं निचले इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। सबसे बड़ी चिंता किसानों और बागवानों के लिए खड़ी हो गई है, जिनकी फसलों पर इस बेमौसमी बारिश की भारी मार पड़ी है।

चोटियों पर बर्फबारी, शहरों में बारिश
लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और चम्बा की ऊंची चोटियों पर रुक-रुक कर हिमपात हो रहा है। वहीं, राजधानी शिमला सहित कांगड़ा और अन्य निचले हिस्सों में झमाझम बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई है। शुक्रवार को धर्मशाला में सबसे ज्यादा 8 मिलीमीटर, कांगड़ा में 4 और शिमला में 3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। मौसम में आए इस अचानक बदलाव से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी शिमला का अधिकतम तापमान 20.4 डिग्री तक लुढ़क गया है।

9 अप्रैल तक राहत की कोई उम्मीद नहीं
मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल इस खराब मौसम से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। 9 अप्रैल तक प्रदेश में ओलावृष्टि और तेज हवाओं को लेकर ऑरेंज और यैलो अलर्ट जारी किया गया है। 4 से 7 अप्रैल के बीच कुल्लू, शिमला, सोलन और मंडी में तेज हवाओं के साथ बिजली कड़कने की संभावना है। वहीं, 7 से 9 अप्रैल के बीच एक और नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे प्रदेश भर में फिर से व्यापक बारिश हो सकती है।

किसानों-बागवानों की बढ़ी धड़कनें
इस बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। भारी ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी गेहूं और मटर की फसल को भारी नुक्सान पहुंचा है। वहीं, सेब के बगीचों में इन दिनों फ्लावरिंग (फूल खिलने) का समय है। ऐसे में ओले गिरने से बागवानों को बड़े आर्थिक नुक्सान का डर सताने लगा है। तेज हवाओं के चलते गुठलीदार फलों (प्लम, आड़ू आदि) को भी भारी क्षति पहुंची है।

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