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हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने गुरुवार को दावा किया कि KYC की गलतियों की वजह से बड़ी संख्या में योग्य लाभार्थी पेंशन और सरकारी स्कीम का फ़ायदा नहीं उठा पा रहे हैं, और उन्होंने इस समस्या को तुरंत ठीक करने की मांग की. पूर्व मुख्यमंत्री ने यहां जारी एक प्रेस बयान में कहा कि राज्य के अलग-अलग इलाकों से बुढ़ापा पेंशन और सहारा स्कीम को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं.
‘KYC की गलतियों को ठीक करे सरकार’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “पहचान वेरिफ़िकेशन (नो योर कस्टमर या KYC) प्रोसेस में गलतियों और एडमिनिस्ट्रेटिव लापरवाही की वजह से बड़ी संख्या में योग्य बुज़ुर्ग लंबे समय से पेंशन से वंचित हैं. सरकार को KYC के नाम पर ज़रूरतमंद लोगों की पेंशन रोकने से बचना चाहिए. राज्य सरकार ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में SC, ST, OBC, माइनॉरिटी और सोशल वेलफ़ेयर के लिए बजट को 1,618 करोड़ रुपये से घटाकर 604 करोड़ रुपये कर दिया है.”
जयराम ठाकुर ने कहा, “बजट में 63 परसेंट की कटौती की वजह से लोगों को पेंशन नहीं मिल रही है. इसलिए, सरकार KYC जैसी टेक्निकल कमियों की आड़ में बुढ़ापे की पेंशन और सहारा पेंशन समेत दूसरी सोशल वेलफेयर स्कीमों को रोक रही है. इसका खामियाजा सही लोगों को भुगतना पड़ रहा है, और कई लोगों की पेंशन एक साल या उससे ज़्यादा समय से शुरू नहीं हुई है.”
बिना वेरिफिकेशन पेंशन रोकने के आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने आगे आरोप लगाया कि इससे भी ज़्यादा गंभीर बात यह है कि सहारा स्कीम के कई असली लोगों को रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है, और उनकी पेंशन रोक दी गई है. बीजेपी नेता ने कहा, “जिन लोगों की पेंशन बिना वेरिफिकेशन के रोक दी गई है, उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है. सरकार को ऐसे सभी मामलों की ज़िला लेवल पर बिना किसी भेदभाव के जांच करनी चाहिए और हर मामले को दोबारा वेरिफ़ाई करना चाहिए.”
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग
जयराम ठाकुर ने आगे मांग की कि बुढ़ापे की पेंशन और सहारा योजना से जुड़े सभी पेंडिंग मामलों को एक खास कैंपेन चलाकर जल्दी सुलझाया जाए. उन्होंने कहा, “अगर किसी अधिकारी, कर्मचारी या किसी और लेवल पर लापरवाही, गलत KYC या गलतियां पाई जाती हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उनके खिलाफ सही कार्रवाई की जानी चाहिए.”












