हिमाचल में मौसम का ‘क्रेजी’ यू-टर्न! 10 दिनोंं में विंटर से समर, 5°C से सीधे 35°C पार पहुंचा पारा, मौसम वैज्ञानिक से समझिए क्या है माजरा?

Khabron wala 

देवभूमि हिमाचल प्रदेश का मौसम इन दिनों किसी फिल्मी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं चल रहा है. जिस मई के महीने में अमूमन सूरज आग उगलता है और मैदानी इलाकों के लोग पहाड़ों की तरफ भागते हैं, उसी मई की शुरुआत में हिमाचल के लोग खुद रजाई और जैकेट ढूंढ रहे थे, लेकिन देखते ही देखते सिर्फ 10 दिनों के भीतर कुदरत ने ऐसा ‘क्रेजी’ यू-टर्न लिया कि लोग स्वेटर उतारकर सीधे पंखे के सामने आ बैठे हैं।

हिमाचल प्रदेश में महज 10 दिनों के भीतर न्यूनतम और अधिकतम तापमान में जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है. जहां मई के पहले हफ्ते में न्यूनतम तापमान गिरकर 5 डिग्री सेल्सियस के आसपास मंडरा रहा था, वहीं अब यह उछलकर 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. सिरमौर के पांवटा साहिब में तो पारा 42 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड स्तर को छू चुका है.

हिमाचल प्रदेश के इस अनोखे मौसम पैटर्न पर मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वरिष्ठ वैज्ञानिक संदीप कुमार शर्मा ने बताया, ‘मई के पहले पखवाड़े (14 मई तक) में प्रदेश में लगातार एक के बाद एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण रुक-रुक कर बारिश, आंधी-तूफान और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी दर्ज की गई. इसी वजह से तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया था और लोगों को मई में भी दिसंबर-जनवरी जैसी ठंड का अहसास हो रहा था’.

मौसम विभाग के शिमला केंद्र के अनुसार, 19 मई से 24 मई के बीच प्रदेश में एक बार फिर पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण हल्की बारिश के आसार बन रहे हैं. विशेषकर 23 और 24 मई को उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है. तापमान की बात करें तो अधिकांश केंद्रों पर न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है, लेकिन कुछ स्थानों पर यह सामान्य से 2-3 डिग्री सेल्सियस अधिक चल रहा है.

आगामी दिनों का पूर्वानुमान साझा करते हुए मौसम विज्ञानी शोभित कटियार ने बताया, ‘बीते 24 घंटों में हिमाचल का मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहा है, जिससे तापमान में तेजी से उछाल आया है. ऊना, कांगड़ा, बिलासपुर, मंडी और सोलन जैसे मैदानी व निचले इलाकों में अगले 3 से 4 दिनों तक तेज धूप खिलेगी. इन क्षेत्रों में तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस तक की और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे उमस और गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा. यहां पारा 35 डिग्री से 38 डिग्री सेल्सियस तक जाने की पूरी संभावना है’.

क्या है इस ‘क्लाइमेट शिफ्ट’ के पीछे की असली वजह?

मई महीने में मौसम के इस उग्र और अप्रत्याशित रूप को पर्यावरणविद् डॉ. सुरेश चंद अत्री ‘क्लाइमेट चेंज’ यानी जलवायु परिवर्तन का एक सीधा और खतरनाक संकेत मानते हैं. डॉ. अत्री के मुताबिक, यह कोई सामान्य मौसमी चक्र नहीं है, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण बिगड़ते पर्यावरण संतुलन का नतीजा है. डॉ. अत्री ने कहा हिमाचल में जो हम देख रहे हैं, यानी अचानक 5 डिग्री की ठंड से सीधे 35-42 डिग्री की झुलसाने वाली गर्मी. इसे पर्यावरण की भाषा में ‘एक्सट्रीम वेदर इवेंट’ (Extremely Volatile Weather) कहा जाता है. इसके पीछे मुख्य वजह पहाड़ों में बढ़ता कंक्रीट का जाल, वनों की कटाई और ग्रीनहाउस गैसों का अत्यधिक उत्सर्जन है. इस वजह से स्थानीय इकोसिस्टम अपना संतुलन खो रहा है’.

डॉ. अत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हम अब भी नहीं संभले, तो आने वाले सालों में ग्लेशियर तेजी से पिघलेंगे और पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाएगा. उन्होंने इसके समाधान के तौर पर तीन मुख्य बातें बताईं. पहाड़ों पर चलने वाले वाहनों और निर्माण कार्यों से होने वाले प्रदूषण पर तुरंत लगाम लगानी होगी. देवदार और स्थानीय प्रजातियों के पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण करना होगा ताकि पहाड़ों का प्राकृतिक तापमान नियंत्रित रहे. हिमाचल आने वाले पर्यटकों और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक सीमा तय करनी होगी, ताकि पर्यावरण पर दबाव कम हो सके.

मौसम के इस डबल अटैक (पहले बेमौसम बारिश-ओले और अब अचानक भीषण गर्मी) ने हिमाचल प्रदेश की रीढ़ यानी कृषि और बागवानी को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है. हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के कृषि जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. के.डी. शर्मा ने फसलों पर पड़ने वाले इसके विनाशकारी प्रभावों का विस्तृत ब्योरा दिया है. डॉ. के.डी. शर्मा के अनुसार, मई का महीना हिमाचल की मुख्य नकदी फसलों और फलों के लिए सबसे संवेदनशील समय होता है. इस बार के मौसम ने तीन प्रमुख स्तरों पर नुकसान पहुंचाया है.

मई के महीने में सेब के पेड़ों में फूल आने (Flowering) और छोटे फल बनने (Fruiting) का बेहद नाज़ुक समय होता है. डॉ. शर्मा ने बताया कि मई की शुरुआत में हुई अचानक तेज बारिश और भीषण ओलावृष्टि (Hailstorm) के कारण पेड़ों से फूल समय से पहले झड़ गए. जो छोटे फल बन रहे थे, उन्हें ओलों ने शारीरिक रूप से नष्ट कर दिया है, इस बेमौसम मार के कारण इस साल सेब की कुल पैदावार में भारी कमी आने की आशंका है, जो बागवानों के लिए बड़ा आर्थिक झटका है.

हिमाचल की आर्थिकी में मटर, टमाटर, बंदगोभी और शिमला मिर्च जैसी नकदी सब्जियों का बड़ा योगदान है. डॉ. के.डी. शर्मा ने बताया, “बेमौसम ठंड, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बिछ गई हैं. अत्यधिक नमी और जलभराव के कारण पौधों की जड़ें सड़ने लगी हैं और कई जिलों से फसलों के पूरी तरह खराब होने की खबरें आ रही हैं”.

हिमाचल के निचले और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में मई की शुरुआत में गेहूं की कटाई और गहाई (Threshing) का काम जोरों पर होता है. लेकिन इस बार मई की बेमौसम बारिश और अंधड़ ने पकी हुई फसलों को खेतों में ही गीला कर दिया, जिससे अनाज की गुणवत्ता खराब हो गई और किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया.

किसानों और बागवानों के लिए डॉ. के.डी. शर्मा के जरूरी टिप्स

जलभराव से बचाएं: कृषि विभाग और पालमपुर यूनिवर्सिटी की ओर से किसानों को सख्त सलाह है कि वे अपने खेतों और बगीचों में पानी बिल्कुल न ठहरने दें. जलभराव (Waterlogging) से फंगल इन्फेक्शन और जड़ सड़ने की बीमारी तेजी से फैलती है.

एंटी-हेल नेट का प्रयोग: भविष्य में ओलावृष्टि के नुकसान से बचने के लिए बागवानों को अपने बगीचों में एंटी-हेल नेट (ओला रोधी जाल) का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए.

फसलों के नुकसान के सटीक आकलन और मुआवजे की प्रक्रिया के लिए किसान भाई तुरंत हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग या हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग की आधिकारिक वेबसाइटों पर जाकर संपर्क करें या अपने नजदीकी कृषि केंद्र (KVK) से मदद लें.

तापमान में आया यह 30 डिग्री का अचानक उछाल केवल फसलों के लिए ही नहीं, बल्कि इंसानी शरीर के लिए भी एक बड़ा शॉक (Shock) है. मेडिकल फिजिशियन डॉ. कपिल शर्मा ने बताया कि जब मौसम इतनी तेजी से करवट बदलता है, तो हमारा इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर हो जाता है, जिससे बीमारियां तेजी से पैर पसारती हैं.

डॉ. कपिल शर्मा के मुताबिक, इन दिनों अस्पतालों की ओपीडी में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ गई है. मौसम का सबसे ज्यादा बुरा असर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर पड़ रहा है.

बच्चों में इस बदलते मौसम के कारण वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, गले में इन्फेक्शन और गैस्ट्रोएंटेराइटिस (उल्टी-दस्त) के मामले बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं. अचानक गर्मी बढ़ने से बच्चे जल्दी डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का शिकार हो रहे हैं.

बुजुर्गों में अचानक तापमान बढ़ने से ब्लड प्रेशर (बीपी) का असंतुलन, घबराहट और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. विशेषकर अस्थमा या सांस की बीमारी से पीड़ित बुजुर्गों के लिए यह मौसम बेहद संवेदनशील है.

अचानक बदलाव से बचें: एसी या ठंडे कमरे से सीधे तेज धूप में बाहर न निकलें और न ही बाहर की भीषण गर्मी से आकर तुरंत फ्रिज का ठंडा पानी पिएं. शरीर को तापमान के अनुकूल होने का समय दें.

हाइड्रेटेड रहें: धूप में निकलते समय पानी की बोतल साथ रखें. ओआरएस (ORS), नींबू पानी, छाछ या नारियल पानी का सेवन करें ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो.

खान-पान का ध्यान रखें: इस मौसम में खाना बहुत जल्दी खराब होता है. इसलिए बासी भोजन और बाहर के खुले हुए कटे फलों को खाने से पूरी तरह परहेज करें. बच्चों को फुल स्लीव्स के कपड़े पहनाएं. ताकि वे मच्छरों और मौसमी फ्लू से बचे रहें.

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