मनाली से 300 KM दूर अंबाला ले जा रहे थे गीला कचरा, फैल रहा था प्रदूषण, हाईकोर्ट ने लगाया ₹2.83 करोड़ जुर्माना

Khabron wala 

विख्यात पर्यटन नगरी मनाली से गीला कचरा 300 किलोमीटर दूर अंबाला ले जाया जा रहा था. इस पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मनाली नगर परिषद से गीले कचरे को अंबाला ले जाने के पीछे का तर्क पूछा है. हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से प्रदूषण कम नहीं होता बल्कि बढ़ता है. अदालत ने कारण दिया कि एक तो यह कचरा 300 किलोमीटर के पूरे रास्ते में बदबू फैलाता है और दूसरा इतनी लंबी दूरी तय करने के लिए गाड़ी चलाने से प्रदूषण पैदा होता है.

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीसी नेगी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद आदेश दिए कि ऐसी परिस्थितियों में अगली सुनवाई की तारीख पर मनाली नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी और मैसर्स सनटैन लाइफ प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित हों. मनाली नगर परिषद पर अदालत ने 2.83 करोड़ का जुर्माना भी लगाया.

हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि इस साल 21 फरवरी को मनाली नगर परिषद के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किए गए निरीक्षण से पता चलता है कि हॉटस्पॉट से संयंत्र में प्राप्त मिश्रित कचरे के कारण आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध फैल रही थी. मौके पर उचित गंध और मक्खी नियंत्रण प्रणाली भी मौजूद नहीं थी. मनाली नगर परिषद ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार संबंधित क्षेत्र से 100% स्रोत पृथक्करण प्राप्त नहीं किया था. वहां गीला अपशिष्ट यानी कचरा बिना किसी उपचार (ट्रीटमेंट) के खुले एरिया में पड़ा हुआ था. इससे कचरे का लीचेट यानी गीला कचरा रिसने से पैदा होने वाला तरल पदार्थ बदबू फैला रहा था. यही नहीं, लीचेट के लिए बनाया गया एक गड्ढा कार्यशील नहीं है. नगर परिषद गीले अपशिष्ट को जटवार, अंबाला स्थित बायोगैस संयंत्र में भेज रही है.

मनाली नगर परिषद ने गीला अपशिष्ट उपचार संयंत्र उपलब्ध नहीं कराया है. रिपोर्ट के अनुसार कुल बकाया अपशिष्ट 78,464 टन था. मैसर्स सनटैन लाइफ प्राइवेट लिमिटेड ने जनवरी 2026 तक केवल 32778.46 टन पुराने कचरे का ही प्रसंस्करण किया है. कंपनी जैव-खनन प्रक्रिया को वैज्ञानिक तरीके से नहीं कर रही थी. इसके अलावा आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन भी कंपनी नहीं कर रही थी. दुख की बात थी कि यह कचरा गौ सदन के पास ब्यास नदी के करीब पाया गया, जो बिना किसी उपचार के सीधे नदी में बह रहा था. निरीक्षण में लीचेट संग्रहण गड्ढे खाली पाए गए और लीचेट के उपचार के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी.

इन परिस्थितियों में, ब्यास नदी में अनुपचारित लीचेट डालने के लिए मनाली नगर परिषद पर 15,30,000 रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है. पुराने कचरे के आंकड़ों को दर्शाने वाला सारणीबद्ध चार्ट भी शपथ पत्र में उल्लिखित किया गया है. उसके अनुसार 45685.54 टन पुराने कचरे का प्रसंस्करण अभी बाकी है. संबंधित स्थलों पर ठोस कचरे के अवैज्ञानिक निपटान के लिए मनाली नगर परिषद पर 2,83,07,591 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

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