ADVERTISEMENT

शिमला में बिजली बोर्ड कर्मचारियों का हल्ला बोल, OPS बहाली और नियमित भर्ती समेत इन 9 मांगों को लेकर किया प्रदर्शन

Khabron wala 

पुरानी पैंशन योजना की बहाली और अन्य लंबित मांगों को लेकर हिमाचल राज्य बिजली बोर्ड के कर्मचारियों, इंजीनियरों और पैंशनरों के सब्र का बांध बुधवार को टूट गया। प्रदेश सरकार और बोर्ड प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कर्मचारियों ने राजधानी शिमला में विधानसभा के बाहर चौड़ा मैदान में एक धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान हजारों की संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

हिमाचल प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड एम्पलाइज यूनियन के आह्वान और विद्युत बोर्ड की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के समर्थन से यह बड़ा आंदोलन किया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार बुधवार सुबह 11 बजे कुमार हाऊस से एक आक्रोश रैली निकाली गई। यह रैली अंबेदकर चौक होते हुए चौड़ा मैदान पहुंची और एक बड़े धरने में तब्दील हो गई। रैली में प्रदेश भर से आए 2000 से 2500 के करीब कर्मचारियों और पैंशनरों ने हिस्सा लिया। भारी भीड़ के चलते राजधानी के मुख्य मार्गों की यातायात व्यवस्था चरमरा गई। स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें

बिजली बोर्ड में पुरानी पैंशन योजना को तुरंत बहाल किया जाए।

बोर्ड में रिक्त पड़े पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू हो और आऊटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए।

मुख्यमंत्री द्वारा कर्मचारियों के हित में की गई घोषणाओं को शीघ्र लागू किया जाए।

कर्मचारियों और पैंशनरों के सेवानिवृत्ति लाभों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित हो।

ताज मोहम्मद मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय लागू किया जाए।

स्मार्ट मीटर नीति की समीक्षा हो।

पदोन्नति में पूर्व की भांति कैडर-कंट्रोलिंग अथॉरिटी की व्यवस्था बहाल हो।

नॉन-आईटीआई फील्ड स्टाफ की पदोन्नति में हो रहा कथित भेदभाव समाप्त किया जाए।

विद्युत मंडल पांगी और शिमला-2 में एएलएम व एलएम के नए पद सृजित किए जाएं।

मांगें न मानीं तो और उग्र होगा आंदोलन : यूनियन

प्रदर्शन के दौरान एम्पलाइज यूनियन और ज्वाइंट एक्शन कमेटी के नेताओं ने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। यूनियन ने कहा कि सरकार को समयबद्ध तरीके से इन सभी लंबित मांगों का समाधान करना होगा। यदि सरकार और प्रबंधन ने अब भी टालमटोल का रवैया अपनाया, तो आने वाले दिनों में कर्मचारी अपने हकों के लिए इस संघर्ष को और तेज करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।

Related Posts

Next Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *