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पांवटा साहिब : अवैध खनन करने वालों के साथ स्टोन क्रेशर में माइनिंग इंस्पेक्टर और माइनिंग गार्ड की तस्वीर वायरल, अवैध खनन पर FIR, बिट्टा स्टोन क्रशर के मालिक अमरजीत सिंह बिट्टा का नाम आया सामने

अवैध खनन करने वालों के साथ स्टोन क्रेशर में माइनिंग इंस्पेक्टर मंगत राम वर्मा और माइनिंग गार्ड नीरज रयान की तस्वीर वायरल

यमुना नदी के रवाहड़ा क्षेत्र में सरकारी जमीन से कथित अवैध खनन और रेत-बजरी चोरी के मामले में पांवटा साहिब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 की रात करीब 10:30 बजे गश्त और माइनिंग चेकिंग के दौरान एक JCB लोडर, एक टिप्पर और एक ट्रैक्टर को कथित तौर पर अवैध खनन करते हुए पकड़ा गया। पुलिस ने तीनों वाहनों को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने अभी तक यमुना नदी से स्टोन क्रेशर से और ट्रैक्टर टिप्पर वाले लोडर से सैंपल नहीं भरे हैं , पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है और आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है बताया जा रहा है की गाड़ियां और लोडर आरोपी बिट्टा के नाम पर है  पांवटा साहिब पुलिस स्टेशन में बिट्टा स्टोन क्रशर के मालिक अमरजीत सिंह बिट्टा से हुई कई घंटे पूछताछ की गई है उसके साथ अपने आप को समाज सेवी बताने वाले गुरदीप सिंह ग़ैरी भी पूछताछ में शामिल हुए आज पुलिस ने क्रेशर यूनियन व मीनिंग अधिकारियों कर्मचारियों के साथ एक मीटिंग डीएसपी ऑफिस में बुलाई है वही मामले में ई डी कार्यकाल प्रधानमंत्री राष्ट्रपति गृहमंत्री को शिकायत भेज दी गई है और केंद्र से भी मामले में छापेमारी और गिरफ्तारियां होने की संभावना बढ़ गईहै

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में 18 अक्टूबर 2026 को FIR नंबर 223/26 भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2), 3(5) तथा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम की धारा 21 के तहत दर्ज की गई है।

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, सहायक उपनिरीक्षक दिनेश कुमार पुलिस टीम के साथ लोअर देवीनगर स्थित यमुना नदी के रवाहड़ा क्षेत्र में गश्त और खनन जांच कर रहे थे। इसी दौरान एक JCB लोडर, एक टिप्पर और एक ट्रैक्टर कथित तौर पर सरकारी जमीन से रेत-बजरी निकालते हुए पाए गए। पुलिस टीम को देखकर वाहन चालकों ने मौके से भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने करीब 100 मीटर दूर उन्हें पकड़ लिया।

पुलिस ने JCB लोडर नंबर UK07HD-0801, टिप्पर नंबर HP17G-6448 और बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर को जब्त किया। पुलिस के अनुसार, वाहनों के चालकों की पहचान सोनी (36), अजय (19) और सुनील (21) के रूप में हुई है। आरोप है कि टिप्पर और ट्रैक्टर में लदी रेत-बजरी को चालकों ने मौके पर गिरा दिया।

मामले में जब्त मशीनों और वाहनों का संबंध बिट्टा स्टोन क्रशर के मालिक अमरजीत सिंह बिट्टा से होने की बात सामने आई है। हालांकि, वाहन स्वामित्व और कथित अवैध खनन में उनकी भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी।

बताया जा रहा है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशों के बाद क्रशर का बिजली कनेक्शन काटा गया था। इसके बावजूद कथित रूप से खनन गतिविधियां जारी रहने के आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया है। पुलिस ने संकेत दिया है कि क्रशर बंद होने के बावजूद खनन किस आधार पर किया जा रहा था, इसकी भी जांच की जाएगी।

डीएसपी मानवेंद्र ठाकुर ने बताया कि पांवटा साहिब पुलिस अवैध खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है और इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने मामले में FIR दर्ज होने की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में कथित रूप से शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जांच अधिकारी एएसआई दिनेश कुमार मामले की आगामी जांच कर रहे हैं।

पुलिस कार्रवाई से खनन कारोबारियों में हलचल

इस मामले में पुलिस की कार्रवाई को अवैध खनन के खिलाफ अहम कदम माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि किसी क्रशर के संचालन पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई हो चुकी थी, तो उससे जुड़ी मशीनें कथित रूप से खनन गतिविधियों में कैसे इस्तेमाल हो रही थीं। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस गतिविधि के पीछे किन लोगों की भूमिका थी और संबंधित विभागों की ओर से क्या निगरानी की गई थी।

मिली जानकारी के अनुसार गत महीने सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में बिट्टा स्टोन क्रशर के खिलाफ हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बड़ी कार्रवाई की थी । बोर्ड के निर्देश पर बिजली विभाग ने क्रशर यूनिट की विद्युत आपूर्ति काट दी है। विभाग के अनुसार, क्रशर यूनिट के पास वैध संचालन की सहमति (CTO) नहीं थी और कई बार नोटिस व निर्देश जारी किए जाने के बावजूद आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया।

हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय पांवटा साहिब की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 33-ए और वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31-ए के तहत की गई है।

2024 से वैध संचालन अनुमति नहीं

विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, बिट्टा स्टोन क्रशर को मिली पिछली संचालन अनुमति 31 मार्च 2024 तक वैध थी। इसके बाद नवीनीकरण के लिए किए गए आवेदन में विभागीय टिप्पणियों और निर्देशों का अनुपालन नहीं किए जाने के कारण अस्वीकृत हुए। बाद में यूनिट ने दोबारा नवीनीकरण के लिए आवेदन किया, जिसे 30 मई 2026 को टिप्पणियों के साथ वापस किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बावजूद यूनिट वैध संचालन अनुमति के बिना संचालित होती रही।

कई बार जारी किए गए नोटिस

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, क्रशर संचालक को 28 सितंबर 2024 से 9 मार्च 2026 के बीच कई बार नोटिस, कारण बताओ नोटिस और निर्देश जारी किए गए। इनमें वैध संचालन अनुमति के बिना गतिविधियां बंद करने और जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे। विभागीय रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूनिट की पर्यावरण मंजूरी 4 मार्च 2026 को समाप्त हो गई थी, जबकि PMT मंजूरी 6 जून 2026 को समाप्त हो चुकी थी।

निरीक्षण में भी सामने आए उल्लंघन

क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान वैध संचालन अनुमति के बिना यूनिट चलाए जाने और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन से संबंधित कमियां दर्ज की गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अनुपालन नहीं होने पर विद्युत आपूर्ति काटने की कार्रवाई की गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी पवन शर्मा ने भी बिट्टा स्टोन क्रशर की विद्युत आपूर्ति काटे जाने की पुष्टि की है। बिजली विभाग के अधिकारियों ने भी कनेक्शन काटे जाने की पुष्टि की है।

यमुना में अवैध खनन को लेकर भी सवाल

स्थानीय स्तर पर यमुना नदी में कथित अवैध और अनियंत्रित खनन को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। नदी में कई स्थानों पर बड़े गड्ढे होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार खनन से नदी के आसपास के क्षेत्र और यमुना पुल के पिलरों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।

हालांकि, इन दावों की वास्तविक स्थिति और खनन गतिविधियों की वैधता का निर्धारण संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही किया जा सकता है। स्थानीय लोगों ने यमुना किनारे खनन गतिविधियों के साथ-साथ पांवटा साहिब डिग्री कॉलेज के आसपास रेत-बजरी से भरे वाहनों की आवाजाही को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि भारी वाहनों के कारण सड़क पर जाम की स्थिति बनती है और विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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