सराहां के समीप शनि मंदिर में शनि जयंती पर भंडारे का हुआ आयोजन, हजारों भक्तों ने मंदिर पहुंचकर लिया शनिदेव कर आशीर्वाद 

सराहां के समीप शनि मंदिर में शनि जयंती पर भंडारे का हुआ आयोजन, हजारों भक्तों ने मंदिर पहुंचकर लिया शनिदेव कर आशीर्वाद

एक सप्ताह पूर्व शनि शिंगणापुर से शनि जयंती के लिए विशेष रूप से लाई गई हैं जोत

: जिला सिरमौर के पच्छाद उपमंडल में सराहां के समीप शनि मंदिर में शनिवार को धूमधाम से शनि जयंती का आयोजन किया गया। मंदिर कमेटी की ओर से भंडारे का विशेष आयोजन किया था। शनि मंदिर के पुजारी गौतम डकौत ने बताया कि शनि जयंती के लिए एक सप्ताह पूर्व महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर से विशेष रूप से ज्योत लाई गई है, जो निरंतर जल रही है। वही हिंदू धर्म में शनि देव को कर्मफल दाता माना जाता है। 2026 की शनि जयंती आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास है। 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक ऐसा दुर्लभ शनिवार का संयोग बना है, जो भक्तों के लिए कष्टों से मुक्ति का सुनहरा अवसर लेकर आया है।

इस वर्ष शनि जयंती के दिन एक अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग बना है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ऐसा संयोग लगभग 13 साल पहले देखा गया था। शनिवार के दिन ही शनि जयंती का पड़ना सोने पर सुहागा माना जाता है, क्योंकि शनिवार स्वयं शनि देव को समर्पित है। इस संयोग में पूजा करने से शनि देव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा शनि जयंती पर करीब 300 साल बाद सूर्य-बुध युति से बुद्धादित्य योग, गजकेसरी योग, शश महापुरुष योग और सौभाग्य योग एक साथ बन रहे हैं। जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए यह दिन किसी वरदान से कम नहीं है। इस विशेष दिन पर विधि-विधान से पूजा करने पर शनि दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। मानसिक तनाव, आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को इस शुभ मुहूर्त का लाभ जरूर उठाना चाहिए।

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