Khabron wala
राजधानी शिमला में सचिवालय के बाहर मंगलवार को हुए वकीलों के प्रदर्शन और चक्का जाम मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है. प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश कर प्रदर्शन करने और यातायात बाधित करने के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. इस कार्रवाई के बाद मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है. दरअसल, पिछले कुछ समय से शिमला के प्रतिबंधित मार्गों पर पुलिस द्वारा की जा रही सख्ती का अधिवक्ता विरोध कर रहे हैं. वकीलों का कहना है कि छोटा शिमला से हाईकोर्ट की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है, जिससे उन्हें अदालत पहुंचने में परेशानी हो रही है. इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को सैकड़ों अधिवक्ता मुख्यमंत्री से मुलाकात करने पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात नहीं होने पर उन्होंने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया.
वकीलों के प्रदर्शन और सचिवालय मार्ग पर चक्का जाम किए जाने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया था. सड़क के दोनों तरफ वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लगने से आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. कई कर्मचारी, स्कूली बच्चों के अभिभावक और अन्य यात्री घंटों जाम में फंसे रहे. स्थिति यह थी कि अपने बच्चे को स्कूल से लाने जा रही एक महिला जाम में फंसने के बाद प्रदर्शन कर रहे वकीलों से भिड़ गई और सड़क खोलने की गुहार तक लगाई.
एसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि सचिवालय क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा बिना अनुमति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर प्रदर्शन किया गया और सार्वजनिक मार्ग को बाधित किया गया. इसके चलते आम जनता और वाहन चालकों को असुविधा हुई. मामले में पुलिस थाना ईस्ट शिमला में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित स्थान उपलब्ध होने के बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्र में एकत्र होकर प्रदर्शन किया. इससे सचिवालय और आसपास के क्षेत्रों की यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध कर आम लोगों को परेशानी पहुंचाना स्वीकार नहीं किया जाएगा. मामले की जांच जारी है और जांच में दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की
जाएगी.












