ADVERTISEMENT

सरकार फिर लेने जा रही ₹700 करोड़ का नया लोन, जानें क्या है खजाने का हाल

Khabron wala 

गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक बार फिर बाजार से कर्ज लेने का फैसला किया है। राज्य सरकार अपनी नियमित वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 700 करोड़ रुपए का नया ऋण लेने जा रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सरकार द्वारा लिया जा रहा यह 700 करोड़ रुपए का कर्ज 13 वर्ष की समयावधि के लिए है। राज्य सरकार को इस ऋण की अदायगी 8 जुलाई, 2039 तक करनी होगी। चिंता का विषय यह है कि इस नए कर्ज के जुड़ने के बाद प्रदेश सरकार पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 1,13,300 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है।

हर महीने भारी-भरकम प्रतिबद्ध देनदारियां

वर्तमान में राज्य सरकार के खजाने पर प्रतिबद्ध देनदारियों का भारी दबाव है। सरकार को हर महीने अनिवार्य भुगतानों के लिए भारी राशि की जरूरत होती है। आंकड़ों के अनुसार प्रतिमाह कर्मचारियों के वेतन के लिए 2,000 करोड़ रुपए, पैंशन के लिए 800 करोड़ रुपए, पुराने कर्जों के ब्याज के रूप में 500 करोड़ रुपए और मूलधन चुकाने के लिए 300 करोड़ रुपए की आवश्यकता होती है। कुल मिलाकर हर महीने लगभग 2,800 करोड़ रुपए की जरूरत के चलते सरकार के पास नियमित अंतराल पर कर्ज लेने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है।

राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से गहराया संकट

प्रदेश की वित्तीय मुश्किलें बढ़ने का सबसे बड़ा कारण केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का बंद होना है। इस अनुदान के रुकने से राज्य को सालाना 8 से 10 हजार करोड़ रुपए का बड़ा नुकसान हो रहा है। हालात यह हैं कि आरडीजी बंद होने के कारण ही वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश के बजट आकार में, पिछले वित्त वर्ष की तुलना में, 3,586 करोड़ रुपए की कटौती करनी पड़ी है।

विकास कार्य प्रभावित, नए संसाधनों की तलाश

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार यदि राज्य को आरडीजी की राशि मिलती रहती, तो विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं होती। इसके अलावा कर्मचारियों और पैंशनरों के लंबित वित्तीय भुगतानों का भी आसानी से निपटारा किया जा सकता था। अब इन प्रतिकूल वित्तीय हालात को देखते हुए राज्य सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों और आय के नए स्रोतों की तलाश कर रही है।

Related Posts

Next Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *