नैना टिक्कर स्थित मां नैना देवी मंदिर के पुजारी विक्रम ठाकुर के खिलाफ पच्छाद पुलिस में sc/st act के अंतर्गत मामला दर्ज ।
फिर विवादों के घेरे में पच्छाद का मां नैना देवी मंदिर, आस्था के मंदिर में जातीय भेदभाव से मानवता शर्मसार।
हिमाचल प्रदेश देवभूमि के नाम से जाना जाता हैं। यहां हर पहाड़ पर देवता वास करते हैं, हर गांव में मंदिर है, और मंदिर ही हमारी संस्कृति, हमारी पहचान और हमारे सामाजिक ताने-बाने का केंद्र हैं। पर जब आस्था के इन्हीं केंद्रों से जातीय भेदभाव और हिंसा की खबरें आने लगें, तो यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि पूरी देवभूमि की आत्मा पर लगा एक कलंक बन जाता है। ऐसा ही एक शर्मनाक मामला सिरमौर जिले के पच्छाद क्षेत्र से सामने आया है।
ग्राम पंचायत नैना टिक्कर स्थित माँ नैना देवी मंदिर जो हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, आज फिर विवादों के घेरे में है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब इस मंदिर पर जातीय आधार पर भेदभाव के आरोप लगे हैं। पहले भी इस तरह की शिकायतें सामने आई थीं और माहौल शांत भी नहीं हुआ था कि पुजारी विक्रम ठाकुर की एक और घिनौनी वारदात ने सबको हिला कर रख दिया।
क्या है पूरा मामला?
दिनांक 29 अगस्त 2026 को जल शक्ति विभाग के कर्मचारी बाला राम (57 वर्ष) पुत्र नानकु राम, निवासी मेहलीअपनी सरकारी ड्यूटी पर तैनात थे। वह अपने साथी कर्मचारियों हरीश कुमार और सुनील कुमार के साथ नैना देवी टैंक की सफाई करने गए थे। यह उनकी रोजमर्रा की ड्यूटी थी, सरकार की संपत्ति की देखभाल।
FIR के अनुसार, इसी दौरान मंदिर के पुजारी विक्रम ठाकुर पुत्र जोगिन्द्र, निवासी जुडब ने वहां आकर उन्हें देखा और आग बबूला हो गया। आरोप है कि पुजारी ने बाला राम को उसकी जाति को लेकर गाली देना शुरू कर दिया। पीड़ित के शब्दों में – _”तू चमार, तुझे यहाँ किसने बुलाया, आज मैं तुझे जान से मार दूंगा।”_ इतना ही नहीं, आरोपी ने पास पड़ा डंडा उठाकर बाला राम के सिर पर जानलेवा हमला कर दिया। हमला इतना भयानक था कि बाला राम का सिर व, चेहरे पर खून की धाराएं बह निकलीं और वह लहूलुहान होकर बेहोश हो जमीन पर गिर पड़ा।
गवाह के तौर पर दो महिलाएं सत्या देवी और एक अन्य महिला भी उस समय पशु चरा रही थीं, जिन्होंने इस भयावह दृश्य को देखा। अगर साथी कर्मचारी हरीश कुमार बीच-बचाव न करता तो शायद जान भी जा सकती थी।
पच्छाद पुलिस में मंदिर पुजारी विक्रम ठाकुर के खिलाफ SC/ST ACT में मामला दर्ज
बाला राम अनुसूचित जाति समुदाय से संबंध रखते हैं। उन्होंने हिम्मत दिखाकर थाना पच्छाद में शिकायत दर्ज करवाई। गौरतलब है कि बाला राम जल शक्ति विभाग में कार्यरत है।और वह रोजमरा की तरह अपनी सरकारी सेवाओं पर तैनात था। उसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि वह अनुसूचित जाति से संबंधित है।वह नैना देवी मंदिर में सरकारी टैंक की सफाई करने क्यों आया। जो कि मंदिर के पुजारी को रास नहीं आया।जिसके चलते मंदिर पुजारी विक्रम ठाकुर ने बाला राम पर जानलेवा हमला कर दिया। पीड़ित बाला राम की शिकायत पर पच्छाद पुलिस ने SC/ST act 1989 के अंतर्गत (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में मामला दर्ज किया है। जांच की जिम्मेदारी सब इंस्पेक्टर नरिंदर कुमार कौंडल को दी गई है। उधर मामले में नरिंदर कुमार ( सब इंस्पेक्टर)ने मामले में अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर मीडिया से बातचीत में मामला दर्ज करने की पुष्टि की है ।
सवाल देवभूमि की पहचान पर
सवाल यह है कि जिस प्रदेश में हम “सर्वे भवन्तु सुखिनः” और “वसुधैव कुटुंबकम” की बात करते हैं, वहां एक सरकारी कर्मचारी को सिर्फ इसलिए मारा-पीटा जाए क्योंकि वह दलित है? क्या पुजारी का काम पूजा-पाठ करना है या जाति देखकर लोगों पर हमला करना?
मंदिर सबका होता है। देवता किसी जाति के नहीं होते। अगर मंदिर के पुजारी ही समाज में नफरत फैलाएंगे, तो आम लोगों से क्या उम्मीद की जाए? यह घटना पूरे पुजारी समाज को बदनाम नहीं करती, लेकिन एक व्यक्ति की घृणित सोच पूरे धार्मिक स्थल की गरिमा को ठेस पहुंचाती है।
प्रशासन को चाहिए कि इस मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई करे ताकि देवभूमि हिमाचल में फिर कोई बाला राम अपनी ड्यूटी करने से डरे नहीं, और किसी मंदिर की सीढ़ियों पर जाति के नाम पर किसी का खून न बहे।











