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हिमाचल प्रदेश के कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र में दवाओं के निर्माण को लेकर नियामक व्यवस्था ने अब सख्त रुख अपना लिया है. सिरमौर स्थित एक दवा कंपनी में निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों ने दवा निर्माण की गुणवत्ता और नियामकीय अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
सबसे अहम बात यह है कि जिन कमियों को पहले भी दूर करने के निर्देश दिए गए थे, उनमें से कुछ का अनुपालन दोबारा किए गए संयुक्त सत्यापन में भी संतोषजनक नहीं पाया गया. इसके बाद हिमाचल प्रदेश ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन (डीसीए) ने इकाई पर कड़ा शिकंजा कसते हुए उत्पादन पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं.
राज्य और केंद्र के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने इकाई का अनुपालन सत्यापन किया. इस दौरान पहले निरीक्षण में चिन्हित की गई कुछ गंभीर कमियां अब भी मौजूद मिलीं. यानी फर्म को सुधार के लिए दिए गए समय के बावजूद सभी आवश्यक सुधार जमीन पर पूरी तरह लागू नहीं हो पाए. फर्म की ओर से कमियां दूर करने के लिए और समय मांगा गया, लेकिन नियामक प्रशासन ने मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मामले में किसी तरह की ढिलाई बरतने से इनकार कर दिया.
स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार ने बताया, “संयुक्त अनुपालन सत्यापन के दौरान पहले बताई गई कुछ कमियां अभी भी दूर नहीं की गई थीं. संबंधित फर्म ने इन्हें दूर करने के लिए समय मांगा था. हालांकि, मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए फर्म को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि संतोषजनक अनुपालन सुनिश्चित होने और नियामक अधिकारियों द्वारा संयुक्त सत्यापन किए जाने तक उत्पादन शुरू नहीं किया जाएगा. ऐसे में जब तक नियामकीय स्तर पर यह पुष्टि नहीं हो जाती कि चिन्हित कमियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप दूर कर दिया गया है, तब तक इकाई में दवा निर्माण गतिविधियां बंद रहेंगी. दोबारा उत्पादन शुरू करने से पहले नियामक अधिकारियों की संयुक्त टीम अनुपालन की स्थिति का सत्यापन करेगी”.
दवा निर्माण में खामी पर जीरो टॉलरेंस
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और नियमों के उल्लंघन को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा निर्माण से जुड़े गंभीर गैर-अनुपालन के मामलों में कड़ी नियामक कार्रवाई जारी रहेगी. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश में निर्मित और उपलब्ध कराई जाने वाली दवाएं सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण हों.
उन्होंने कहा कि दवाएं सीधे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ी होती हैं. ऐसे में निर्माण प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सरकार प्रदेश में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए नियामकीय व्यवस्था को और प्रभावी बनाएगी.










