Khabron wala
कांगड़ा जिले की हटपंग पंचायत स्थित ठाकुरद्वारा गाँव में एक अत्यंत दुखद हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। 12 सितंबर की वो मनहूस शाम दो मासूम चिरागों के जीवन में ऐसा अंधेरा भर गई, जिसकी भरपाई अब कभी नहीं हो सकती। गाँव-गाँव जाकर दूसरों की सांसें बचाने वाली आशा वर्कर रेनू बाला को क्या मालूम था कि मौ.त उनके ही घर में घात लगाए बैठी है। अचानक ज़ह.रीले सांप के डसने से उनकी सांसें टूटने लगीं। जब तक परिजन और रिश्तेदार कुछ समझ पाते और सहायता के लिए पहुंचते, तब तक रेनू बाला द.म तोड़ चुकी थीं। 13 सितंबर को जब उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ, तो वहाँ मौजूद हर शख्स की आँखें छलक पड़ीं।

दर्द की यह दास्तान यहीं खत्म नहीं होती, असल कयामत तो उन दो बेकसूर बच्चों—हर्ष और निधि—पर टूटी है। करीब छह साल पहले पिता श्याम सिंह के निधन के बाद रेनू बाला ने ही मेहनत-मजदूरी और सेवाभाव के बल पर अपने नौनिहालों को संभाला था। पर किस्मत के क्रूर फैसले ने आज उनसे ममता का वो आखिरी आँचल भी छीन लिया। हर्ष और निधि की पथराई आँखें आज भी दरवाज़े पर माँ का इंतज़ार कर रही हैं। पूरा गाँव सद.मे में है और हर किसी का दिल उन अनाथ बच्चों के अनिश्चित भविष्य को सोचकर कांप उठता है।
उनके इस तरह अचानक निधन से न सिर्फ परिवार टूटा है, बल्कि पूरा गांव और आसपास का इलाका गहरे सद.मे में है। मासूम बच्चों के अनिश्चित भविष्य को देखते हुए ग्रामीणों और परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि इस संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार को तुरंत हर संभव वित्तीय व सामाजिक सहायता प्रदान की जाए।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें









