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नवरात्र में मातम: शीतला माता मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं को ट्रक ने कु..चला, 14 की मौ**त- 32 घायल

Khabron wala 

नवरात्र के पावन दिनों में हिमाचल प्रदेश से लेकर देश के विभिन्न राज्यों के मंदिरों तक श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ रहा है। हिमाचल के शक्तिपीठों और प्रसिद्ध मंदिरों में लाखों श्रद्धालु माता के दरबार में शीश नवाकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं। देशभर में मंदिरों में जयकारों की गूंज है, लेकिन इसी आस्था के माहौल के बीच मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।

यहां प्राचीन शीतला माता मंदिर के पास एक तेज रफ्तार ट्रक ने श्रद्धालुओं के बीच कहर बरपा दिया। इस भीषण हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 32 अन्य घायल हो गए। घायलों में सात की हालत गंभीर बताई जा रही है। मृतकों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं।

सातवें नवरात्र पर माता के दरबार में उमड़ी थी भीड़

जानकारी के अनुसार ग्वालियर जिले के सातउं गांव स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में नवरात्र के सातवें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में भक्तों की आवाजाही बनी हुई थी। इसी दौरान चीनौर रोड की ढलान पर धान से लदा एक ट्रक अचानक तेजी से नीचे की ओर बढ़ने लगा। इससे पहले कि श्रद्धालु कुछ समझ पाते, ट्रक सड़क किनारे मौजूद लोगों और दुकानों को अपनी चपेट में लेता हुआ मंदिर के प्रवेश द्वार से जा टकराया।

प्रत्यक्ष घटनाक्रम के मुताबिक, ट्रक की रफ्तार और टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर चीख-पुकार मच गई। कई श्रद्धालु ट्रक की चपेट में आ गए, जबकि टक्कर के कारण मंदिर की दीवार ढह गई। कुछ लोग मलबे के नीचे दब गए। नवरात्र के दौरान माता के दर्शन करने पहुंचे परिवारों के लिए यह पल जिंदगी का सबसे भयावह अनुभव बन गया। हादसे की खबर फैलते ही आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़े और राहत कार्य में जुट गए।

14 लोगों की मौत, 32 घायल

इस दर्दनाक दुर्घटना में 14 लोगों की जान चली गई, जबकि 32 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों में दो पुलिसकर्मी भी बताए गए हैं। सात घायलों की स्थिति गंभीर है, जिससे मृतकों की संख्या को लेकर भी चिंता बनी हुई है। घायलों को जयारोग्य अस्पताल के शासकीय ट्रॉमा सेंटर सहित अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस और प्रशासन की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। ट्रक को हटाने और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए हाइड्रा मशीन की मदद ली गई। इस दौरान वहां मौजूद मेडिकल कॉलेज के कुछ विद्यार्थियों ने भी घायलों की सहायता की। स्थानीय लोगों, पुलिसकर्मियों और बचाव दलों ने मिलकर प्रभावित लोगों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की।

कलेक्टर और एसपी मौके पर पहुंचे

घटना की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर की कलेक्टर रुचिका चौहान और पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह यादव समेत वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे। प्रशासन ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, धान से लदा ट्रक ढलान पर अचानक तेजी से आगे बढ़ा था। हालांकि, ट्रक अनियंत्रित कैसे हुआ और दुर्घटना के पीछे तकनीकी खराबी, चालक की लापरवाही या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

ग्वालियर में श्रद्धालुओं की मौत की खबर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में इस हादसे को हृदयविदारक और पीड़ादायक बताया। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति और शोक संतप्त परिवारों को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने दुर्घटना में घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

हिमाचल के मंदिरों में उमड़ रही भीड़

नवरात्र के दौरान हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों और मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही रहती है। मां ज्वालामुखी, मां चिंतपूर्णी, मां नयना देवी, मां चामुंडा और मां ब्रजेश्वरी के दरबार में देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त पहुंचते हैं। ऐसे अवसरों पर मंदिर परिसरों, संपर्क सड़कों, पार्किंग स्थलों और संकरे रास्तों पर भीड़ का दबाव बढ़ जाता है। ग्वालियर की यह घटना याद दिलाती है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

विशेषकर नवरात्र जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में यातायात नियंत्रण, भारी वाहनों की आवाजाही पर निगरानी, ढलान वाले रास्तों पर अतिरिक्त सतर्कता, भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था बेहद जरूरी है। हिमाचल सहित देश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच बेहतर समन्वय ऐसी दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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