बीबीएन में दवाओं के फेल सैंपल बढ़ा रहे चिंता, ड्रग विभाग पर उठे सवाल ?
ड्रग अलर्ट में सामने आ रहे NSQ सैंपल, अधिकारियों की संपत्तियों की स्वतंत्र जांच की मांग
देश के प्रमुख फार्मा उत्पादन केंद्रों में शुमार बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) में दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरने के मामले लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और राज्य स्तर पर जारी होने वाले ड्रग अलर्ट में समय-समय पर बीबीएन की विभिन्न फार्मा इकाइयों से जुड़े Not of Standard Quality (NSQ) सैंपल सामने आते रहे हैं। सवाल अब केवल सैंपल फेल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह है कि फेल सैंपल सामने आने के बाद नियामक कार्रवाई कितनी तेज, पारदर्शी और प्रभावी होती है।
दवा उद्योग की प्रतिष्ठा और मरीजों की सुरक्षा से सीधे जुड़े इस मुद्दे पर ड्रग कंट्रोल प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय स्तर पर नागरिकों और विभिन्न संगठनों की ओर से मांग की जा रही है कि पिछले वर्षों में फेल हुए सैंपलों, लिए गए नियामक कदमों और उनके अंतिम परिणामों का सार्वजनिक रिकॉर्ड सामने रखा जाए।
किसी दवा का नमूना गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता तो नियामक व्यवस्था का उद्देश्य केवल संबंधित कंपनी को नोटिस जारी करना नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार बैच की पहचान, बाजार से वापसी, कारणों की जांच और कानून के तहत उचित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
यही वह बिंदु है जहां बीबीएन में व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक दलों के नेताओं का कहना है कि कई मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया लंबी खिंचने से यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि संबंधित बैच को बाजार से कितनी तेजी से वापस कराया गया, कितनी मात्रा में दवा रिकॉल हुई और जिम्मेदारी तय करने के बाद क्या अंतिम कार्रवाई की गई।
‘नोटिस से आगे कब बढ़ेगा सिस्टम?’
फार्मा उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण के लिए कई स्तरों पर व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन किसी सैंपल के फेल होने के बाद नोटिस, जवाब, जांच और अंतिम कार्रवाई के बीच लगने वाला समय नियामक तंत्र की वास्तविक क्षमता का पैमाना बन जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि
अगर किसी बैच की गुणवत्ता पर सवाल उठ चुका है तो उसकी बाजार से वापसी और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कितना समय लगता है?
इसके साथ ही यह भी सार्वजनिक होना चाहिए कि पिछले पांच वर्षों में कितने सैंपल फेल हुए, कितने मामलों में उत्पादन रोका गया, कितने बैच रिकॉल कराए गए, कितने लाइसेंस पर कार्रवाई हुई और कितने मामलों में अभियोजन शुरू हुआ।
बीबीएन में लगातार सामने आने वाले गुणवत्ता संबंधी मामलों ने नियामक तंत्र की निगरानी क्षमता को लेकर बहस तेज कर दी है। यदि किसी इकाई के सैंपल बार-बार फेल होते हैं तो यह जांच का विषय होना चाहिए कि समस्या केवल किसी एक बैच की थी या उत्पादन और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था में ही गंभीर कमी थी।
इसी तरह, बार-बार गुणवत्ता मानकों में चूक करने वाली इकाइयों के खिलाफ की गई कार्रवाई और उसके परिणाम भी सार्वजनिक होने चाहिए।
विभागीय कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कुछ स्थानीय लोगों और संगठनों ने ड्रग कंट्रोल प्रशासन से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों की ज्ञात आय के मुकाबले संपत्तियों और निवेश की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
चर्चा है कि ड्रग विभाग के कुछ कर्मचारी एवं अधिकारियों ने प्रदेश में व प्रदेश के बाहर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीद रखी है और भ्रष्टाचार से कमाया गया धन का निवेश किया जा रहा ।
बीबीएन जैसे बड़े फार्मा क्लस्टर के लिए अब केवल छिटपुट कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा रही। मांग है कि सरकार और ड्रग कंट्रोल प्रशासन पिछले पांच वर्षों का एक विस्तृत ‘क्वालिटी और एनफोर्समेंट ऑडिट’ सार्वजनिक करे।
इसमें बताया जाए कि
कितने दवा सैंपल लिए गए और कितने फेल हुए?
कितनी इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी हुए?
कितने बैच बाजार से वापस कराए गए?
कितनी इकाइयों का उत्पादन निलंबित हुआ?
कितने लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए?
कितने मामलों में अदालत में अभियोजन शुरू हुआ?
बार-बार सैंपल फेल होने वाली इकाइयों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
फेल सैंपल की सूचना मिलने और वास्तविक कार्रवाई के बीच औसतन कितना समय लगा ?
अधिकारियों और कर्मचारियों की निगरानी की कोई व्यवस्था है, जो लंबे समय से एक ही क्षेत्र अथवा कार्यालय में तैनात हैं?
क्या पिछले वर्षों में ड्रग कंट्रोल विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, रिश्वत या मिलीभगत से संबंधित कोई शिकायत प्राप्त हुई? यदि हां, तो उन पर क्या कार्रवाई हुई?
क्या विभाग अपने अधिकारियों और कर्मचारियों की घोषित चल-अचल संपत्तियों का नियमित सत्यापन करता है?
क्या विभाग इस बात की जांच कराने के लिए तैयार है कि उसके कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों या उनके निकट संबंधियों के नाम पर हिमाचल से बाहर हाल के वर्षों में बड़ी संपत्तियां खरीदी गई हैं या नहीं?
क्या बद्दी क्षेत्र में दवा सैंपल फेल होने और उन पर हुई कार्रवाई का वर्षवार पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि जनता और दवा उद्योग दोनों विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर सकें?
बीबीएन की पहचान केवल हिमाचल ही नहीं, बल्कि देश के बड़े फार्मा मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के रूप में है। इसलिए यहां सामने आने वाला प्रत्येक गुणवत्ता संबंधी मामला पूरे औद्योगिक क्षेत्र की साख से जुड़ जाता है।
मुद्दा किसी एक कंपनी को कटघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों तक पहुंचने वाली हर दवा निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरे और यदि कहीं चूक सामने आए तो कार्रवाई तेज, निष्पक्ष और दिखाई देने वाली हो।
गौरतलब है कि चर्चा होती रही है कि ड्रग विभाग में अनेक कुछ कर्मचारी भ्रष्टाचार में पूरी तरह लिप्त है और पिछले कुछ वर्षों का यदि रिकॉर्ड खंडाला जाए तो विजीलेंस विभाग द्वारा कुछ कर्मचारियों को रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए भी गिरफ्तार किया गया है जिनके मामले कोर्ट में या तो लंबित है या यह समाप्त हो गए है ।









