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पावटा साहिब : लाल सोना हुआ बर्बाद , किसान खून के आंसू रोने को मजबूर ,स्थानीय प्रशासन नहीं कर रहा मदद

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले का लाल सोना यानी कि  स्ट्राबेरी इन दिनों तैयार हो चुकी है तथा इसकी मांग हिमाचल प्रदेश के साथ साथ पड़ोसी राज्यों में बढ़-चढ़कर होती थी खेतो में सड़ रहा है  सिरमौर ही हिमाचल प्रदेश का वह जिला है जिसमें सबसे पहले स्ट्राबेरी की फसल लगाई गई थी स्ट्राबेरी इन दिनों ₹100 से लेकर₹200 किलो तक बाजार में बिकता था आज फ्री में भी लेने कोई नहीं पहुच रहा है | वर्तमान में सिरमौर जिले का लाल सोना यानी कि  स्ट्राबेरी की फसल तैयार हुई है परंतु विपणन और परिवहन की व्यवस्था न होने के कारण किसान बहुत परेशान है । कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने के लिए सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन और कर्फ्यू के कारण मजदूर व किसान वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुआ  है  |

पावटा साहिब के स्थानीय किसानों ने बताया कि स्ट्राबेरी की फसल को एक बीघा  में लगाने के लिए करीब 40000 रूपये का खर्च आता है तथा पावटा साहिब के पुरुवाला पंचायत  में करीब 300 बीघा में किसानों ने स्ट्राबेरी की फसल उगाई हुई है कोरोना वायरस के कारण बंद  के बाद मौसम की ऐसी मार पड़ी कि तेज बारिश के कारण उनकी फसल खेतों में ही खराब हो रही है पहले इस फसल को देहरादून यमुनानगर चंडीगढ़ आदि जगह पर भेजा जाता था परंतु अब कोई खरीददार इनको लेने के लिए तैयार नहीं है |

पावटा साहिब के  किसानों का आरोप है कि एचपीएमसी भी उनकी फसल लेने से इंकार कर रहा है क्योंकि स्ट्रॉबेरी का जैन व जूस इत्यादि बनाकर एचपीएमसी द्वारा विक्रय किया जाता है |  वहीं किसानो का कहना है कि किसान खून के आंसू रोने को मजबूर है परंतु स्थानीय नेता व प्रशासन उनकी किसी तरह से भी मदद करने में लाचार साबित हुए हैं | स्थानीय किसानों ने दुख भरी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उनकी फसल खेतों में ही सड़कर खराब हो रही है तथा पकी हुई स्ट्रौबरी केवल दो-तीन दिन ही सही रह सकती  है तथा उसके बाद सड़ने लग जाती है जिस कारण इसका संग्रहण भी नहीं किया जा सकता | किसानों ने बताया कि यह फसल पकने का टाइम था तथा इसी दौरान मौसम व लॉकडाउन की मार किसानों के ऊपर पड़ी है उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनकी फसल को बेचने का प्रबंध करवाया जाए तथा किसानों को ख़राब हुई फसल का उचित मुआवजा भी दिया जाए |

पावटा साहिब  में नेशनल हाईवे देहरादून चंडीगढ़ के किनारे किसानों के द्वारा ही स्ट्राबेरी बेचने के लिए रेहड़ी लगाईं जाती थी  तथा इन रेहडियो पर ही स्ट्रॉबेरी शेक की भी खूब मांग होती थी  इस रोड पर सफर करने वाले लोग अपनी गाड़ी रोक कर स्ट्राबेरी खरीद रहे होते थे तथा पेकिंग करवा कर लें जा रहें होते थे आज वीरान हो गया है  | किसानों का कहना है कि इस बार स्ट्रॉबेरी की फसल अच्छी हुई थी  तथा उन्हें रेट भी अच्छा मिलने की उम्मीद थी परन्तु सब बर्बाद हो गया है ।गोरतलब है की अधिकारी व कर्मचारी शिमला अधिकारियो व नेतायो तक सिरमौर की इस स्ट्राबेरी का स्वाद पहुचाते रहे है | परन्तु अब अब इन गरीब किसानो की मदद करने को कोई तेयार नहीं है | किसानों ने मांग की है कि वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए फसल ऋण को भी माफ करने साथ फसलों को हुए नुकसान के एवज में मुआवजा प्रदान किया जाए अन्यथा किसानों को अन्य राज्यों की भांति लोन न वापिस करने की स्थिति में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है ।

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