पंचकर्म से सुदृढ़ हो रही पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा, सिरमौर में 89 संस्थानों के माध्यम से मिल रहीं आयुष सेवाएं
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ पंचकर्म टेक्नीशियन प्रशिक्षण से युवाओं के कौशल विकास और रोजगार की संभावनाओं को मिल रहा बढ़ावा
Khabron wala
नाहन, 19 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आयुर्वेद एवं अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। प्रदेश के ग्रामीण, शहरी एवं दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से आयुष संस्थानों के माध्यम से उपचार, स्वास्थ्य संवर्धन तथा निवारक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसी कड़ी में पंचकर्म जैसी पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पंचकर्म आयुर्वेद की एक पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है, जिसमें रोगी की स्वास्थ्य स्थिति एवं चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुरूप विशिष्ट प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य चयनित स्वास्थ्य समस्याओं के प्रबंधन में सहायता करना तथा स्वास्थ्य एवं वेलनेस को प्रोत्साहित करना है।
जिला सिरमौर में 89 संस्थानों के माध्यम से आयुष सेवाएं
जिला सिरमौर में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तृत नेटवर्क कार्यरत है। जिले में कुल 89 स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से आयुष सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इनमें 72 आयुष्मान आरोग्य संस्थान, 15 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र तथा दो आयुर्वेदिक अस्पताल शामिल हैं।
इन संस्थानों के माध्यम से उपलब्ध सुविधाओं, प्रशिक्षित चिकित्सकीय कर्मचारियों तथा संस्थान की क्षमता के अनुसार लोगों को आयुर्वेदिक उपचार एवं चयनित पंचकर्म प्रक्रियाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर बनाने तथा समुदाय में आयुष पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायता मिल रही है।
पंचकर्म की विभिन्न प्रक्रियाओं से उपचार की सुविधा
जिला सिरमौर में संबंधित संस्थानों की उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार शिरोधारा, जानु बस्ती, ग्रीवा बस्ती, कटी बस्ती, नस्य कर्म, स्नेहन, स्वेदन, अग्निकर्म, रक्तमोक्षण, मर्म चिकित्सा, योनि पिचू तथा अन्य चयनित आयुर्वेदिक प्रक्रियाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं।
इनमें से कुछ प्रक्रियाओं का पारंपरिक रूप से दर्द एवं अकड़न के प्रबंधन में उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, जानु बस्ती का उपयोग घुटनों से संबंधित कुछ समस्याओं में, जबकि ग्रीवा बस्ती एवं कटी बस्ती का उपयोग गर्दन और कमर की कुछ समस्याओं में किया जाता है। शिरोधारा एवं अभ्यंग जैसी प्रक्रियाएं विश्राम और तनाव प्रबंधन में सहायक हो सकती हैं। हालांकि, इन प्रक्रियाओं के लाभ व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं और इनके प्रभावों के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाणों का स्तर अलग-अलग है।
आयुष स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य केवल उपचार उपलब्ध करवाना ही नहीं, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, व्यक्तिगत स्वच्छता तथा समय पर चिकित्सकीय परामर्श स्वस्थ जीवन के महत्वपूर्ण पहलू हैं। पंचकर्म एवं अन्य आयुर्वेदिक प्रक्रियाओं का चयन रोगी की स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सकीय जांच, आयु, अन्य बीमारियों और संभावित जोखिमों को ध्यान में रखकर किया जाना आवश्यक है।
पंचकर्म उपचार से राहत महसूस कर रहे लाभार्थी
जिला सिरमौर के नाहन स्थित गुन्नू घाट निवासी रंजीत सिंह बताते हैं कि घुटनों में दर्द की समस्या के चलते वह उपचार के लिए जिला आयुर्वेदिक अस्पताल, नाहन पहुंचे, जहां उन्हें पंचकर्म चिकित्सा सुविधा प्रदान की गई।
रंजीत सिंह के अनुसार, पंचकर्म प्रक्रिया से उपचार के बाद उन्हें काफी आराम और सुकून महसूस हुआ। उन्होंने बताया कि उपचार प्रक्रिया से बाहर आने के बाद उन्हें शरीर में हल्कापन महसूस हुआ। रंजीत सिंह ने जिला मुख्यालय नाहन में पंचकर्म जैसी पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होने से लोगों को अपने क्षेत्र में ही आयुर्वेदिक उपचार प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।
इसी प्रकार, नाहन निवासी सुनीधि अग्रवाल ने सिरदर्द एवं चक्कर आने की समस्या के चलते जिला आयुर्वेदिक अस्पताल, नाहन में शिरोधारा प्रक्रिया करवाई। उनके अनुसार, उपचार के दूसरे दिन उन्हें विश्राम महसूस हुआ तथा सिरदर्द में कुछ अंतर अनुभव हुआ। उन्होंने आयुर्वेदिक अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के लिए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया। सुनीधि अग्रवाल का अनुभव पारंपरिक चिकित्सा सुविधाओं के प्रति लोगों की रुचि को दर्शाता है।
पंचकर्म टेक्नीशियन प्रशिक्षण से युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं
जिला सिरमौर में आयुष विभाग द्वारा पंचकर्म चिकित्सा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ युवाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। इसी पहल के तहत पच्छाद विधानसभा क्षेत्र के क्वाकधार गांव की लवली तथा नाहन विधानसभा क्षेत्र के बनेठी गांव की कृतिका पुंडीर और स्नेहा ठाकुर एक वर्षीय पंचकर्म टेक्नीशियन कोर्स कर रही हैं।
इस प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को पंचकर्म की विभिन्न प्रक्रियाओं का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने तथा आयुष स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित क्षेत्र में अपने कौशल को विकसित करने का अवसर मिल रहा है। इस प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने तथा युवाओं को भविष्य में रोजगार की संभावनाएं तलाशने में सहायता कर सकते हैं।
प्रशिक्षु लवली, कृतिका पुंडीर और स्नेहा ठाकुर ने प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं के लिए इस प्रशिक्षण से रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से युवाओं को नया कौशल सीखने का अवसर मिल रहा है। इससे युवा आयुष एवं पंचकर्म चिकित्सा के क्षेत्र की ओर आकर्षित होंगे और भविष्य में रोजगार की संभावनाएं तलाश सकेंगे।
लवली, कृतिका पुंडीर और स्नेहा ठाकुर जैसे प्रशिक्षुओं की भागीदारी से आयुष क्षेत्र में कौशल विकास को प्रोत्साहन मिल रहा है। एक वर्षीय पंचकर्म टेक्नीशियन पाठ्यक्रम युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने तथा इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है।
जिला सिरमौर के विभिन्न क्षेत्रों में आयुष संस्थानों का नेटवर्क होने से लोगों को स्थानीय स्तर पर चयनित पारंपरिक चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त करने में सहायता मिल रही है। इससे कुछ रोगियों के लिए उपचार हेतु दूर स्थित स्वास्थ्य संस्थानों तक जाने की आवश्यकता कम हो सकती है। साथ ही, मौजूदा संस्थानों के माध्यम से सेवाओं का विस्तार प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के साथ रोगी सुरक्षा, प्रशिक्षित चिकित्सकीय कर्मचारियों की उपलब्धता, स्वच्छता तथा उचित चिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
इस प्रकार, जिला सिरमौर में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क और पंचकर्म टेक्नीशियन प्रशिक्षण पारंपरिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, स्वास्थ्य जागरूकता तथा कौशल विकास को प्रोत्साहित करने में योगदान दे रहे हैं। इन प्रयासों से लोगों को स्थानीय स्तर पर चयनित स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच बनाने और युवाओं को व्यावसायिक कौशल विकसित करने के अवसर मिल रहे हैं।
(Dr. Naresh Chauhan, Senior Physician Specialist, BAMS MD Panchkarma, District Ayush Hospital, Nahan, District sirmour
कार्यालय जिला लोक सम्पर्क अधिकारी, सिरमौर स्थित नाहन, हि0प्र0
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