पांवटा साहिब: वार्ड नंबर 5 में गंदगी से लोगो का घरों से बाहर निकला हुआ मुश्किल….
पांवटा साहिब शहर के बीचों बीच स्तिथ वार्ड नंबर 5 में गंदगी का वो आलम है कि लोगों का जीना मुश्किल हो गया है, लोग अपने घरों से बाहर 5 मिनट भी खड़े नहीं रह सकते हैं।वार्ड नं 5 और 7 के बीच बहने वाला ये गंदा नाला जिसमे शहर भर का गंदा पानी दिन रात बहता है कूड़ा कचरा भी उसमे बड़ी तादात में होता है जिसकी वजह से आसपास रहने वाले लोगों के घर में बदबू के साथ साथ मक्खी और मच्छरों का होना एक आम बात है।सही सड़क का न होना भी एक महत्वपूर्ण समस्या के रूप में लोगों के सामने आता है क्योंकि किसी भी अपातकालीन स्तिथि में यहां के लोगों को वाहन की आवाजाही करवाने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है, इतना ही नहीं यहां रह रहे लोगों का यह कहना है कि उनकी पीढ़ियां यहां रह चुकी है लेकिन उन्होंने इस वार्ड में सड़क देखी ही नहीं।वार्ड नंबर पांच व सात के पार्षद द्वारा चुनाव के समय इस नाले को बंद करवाने का वादा ले कर लोगो से वोट माँगा था लेकिन नगर परिषद बने को फिर से पांच साल हो गए है दोबारा नगर परिषद के चुनाव आ गए। लोगो का कहना अब फिर प्रत्याशी इस मुद्दे को लेकर वोट मांगे गे जीत के बाद फीर यह मुद्दा खत्म हो जाएगा व वार्ड के लोगो के इस गंदे नाले के साथ ही रहना पडेगा। इस दौरान वार्ड नंबर पांच व सात के लोगो ने कहा की पिछले कई सालो से गंदे नाले को बंद करना व इसकी साफ़ सफाई करना इन वार्डो को सबसे बड़ा मुद्दा है पर हर बार चुनाव के दौरान प्रत्याशियों का यह मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा होता है और जीत के बाद प्रत्याशी इस मुद्दे को भूल जाते है। लोगों का कहना है कि शहर में आए दिन सरकार द्वारा नए से नए विकास कार्य किए जा रहे हैं तो हमारा वार्ड आज भी विकास की दृष्टि से 70 साल पीछे क्यों है क्या इन्हे जिंदगी भर इसी तरह की जिंदगी जीनी पड़ेगी।क्या सरकार एवं प्रशासन केवल धरने प्रदर्शन करने वालों की ही सुनवाई करेगी या जो गरीब चुपचाप अपना शोषण करवा रहा है क्या जिंदगी भर उनका शोषण ही होता रहेगा इस बात का जवाबदेह कौन है।क्या केवल चुनावों के दौरान ही मासूम जनता का दुर्पयोग किया जाता है और बड़ी बड़ी बाते करके इन नासमझ लोगों का इस्तेमाल किया जाता है, झूठे वादे और झूठे आश्वासन ही इनकी किस्मत में है।इतना ही नहीं स्थानीय लोगों ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से अपील करते हुए कहा है कि जल्द से जल्द उनकी समस्याओं पर गौर की जाए अन्यथा उन्हें मजबूरन सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलना पद सकता है।









