(नीना गौतम) आज हम आपको एक ऐसी सख्शियत से रु व रु करवाने जा रहे हैं जिनको भगवान ने बचपन से जुवान नहीं दी है लेकिन हुन्नर कई दिए। इशारों ही इशारों में बात को समझने व समझाने बाले यह व्यक्ति हैं पिंदी उर्फ टपिन्द्र पाल पहलवान। पिंदी का जन्म तो गुरु की नगरी आनंदपुर साहिब में हुआ लेकिन वर्तमान में यह हिंदू सिक्खों की संगम स्थली मणिकर्ण में रहते हैं। वहां यह अपने भाई की दुकान को चलाने में भरपूर मदद करते हैं। पिंदी बोल नहीं सकता है लेकिन इशारों ही इशारों में बात को समझ भी लेता है और समझाने का प्रयास भी करता है लेकिन क्या हुआ जुवान नहीं है तो हुन्नर तो है न।
पिंदी बहुमुखी प्रतिभा का धनी है। पंजाब में पहलवानी में खूब नाम कमाया और बड़े-बड़े पहलवानों के छक्के भी छुड़ाए। यही कारण है कि पिंदी को तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के कर कमलों के द्वारा पहलवानी में राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। इसके अलावा कई मेडल व अन्य पुरस्कार मिलते रहे। पिंदी सिर्फ पहलवानी तक सीमित नहीं रहा बल्कि अन्य कई बल पूर्वक खेलों को भी खेलता रहा जिसमें चलती कार को रोकना। खड़ी कार को ऊपर उठाना, ट्रैक्टर को रोकना आदि आदि। यही नहीं मोटर साइकिल व ट्रैक्टर को अपने ऊपर चढ़ाने में भी गुरेज नहीं की।
कहीं गढ़े में कार फंस जाती थी तो उसे निकालने के लिए भी पिंदी पहलवान को ही बुलाया जाता था। इसके अलावा पिंदी 100 किलोग्राम का बजन अपने दांतों से उठाने में भी माहिर है और दांतों में उठाने के बाद उस बजन को आसमान की तरफ उछालने में मजा लेते हैं। पहलवानी में वे रोहतक के पहलवान देवमूर्ति को अपना गुरु मानते हैं। इसके अलावा पिंदी को फिल्मों में काम करने का शौक भी है और माचिस फिल्म में काम किया है। इसके अलावा मुकेश खन्ना के साथ भी काम करने का अवसर प्रदान हुआ लेकिन जुवान न होने के कारण वे इस क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ सके।












