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चुराह के लाल ने बढ़ाया हिमाचल का मान, थाईलैंड में गोल्ड के बाद अब एशियन गेम्स 2027 का टिकट किया पक्का

Khabron wala 

अगर मजबूत इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत हो, तो संसाधनों का अभाव भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकता। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के दुर्गम क्षेत्र चुराह के युवा पावरलिफ्टर राजेश ठाकुर ने इसे सच साबित कर दिखाया है। हाल ही में थाईलैंड में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले राजेश ठाकुर का चयन अब भारत की ओर से एशियन गेम्स 2027 के लिए हुआ है। वर्ष 2027 में सिंगापुर में होने वाले इन प्रतिष्ठित एशियाई खेलों में चुराह का यह बेटा देश का प्रतिनिधित्व करेगा।

राजेश ठाकुर को एशियन गेम्स का यह टिकट उनके विश्वस्तरीय प्रदर्शन के आधार पर सीधा चयनकर्ताओं द्वारा दिया गया है। इससे पहले राजेश ने थाईलैंड में आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 130+ किलोग्राम भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी बेजोड़ ताकत और तकनीकी कौशल से दुनिया भर के दिग्गजों को पछाड़कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। राजेश का अगला और सबसे बड़ा लक्ष्य अब एशियन गेम्स में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।

4 बार रह चुके हैं नैशनल चैंपियन

चुराह उपमंडल की ग्राम पंचायत जस्सोरगढ़ के छोटे से गांव पट्टी से ताल्लुक रखने वाले राजेश का सफर आसान नहीं रहा। आर्थिक तंगी और दुश्वारियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने खेल को चंडीगढ़ में तराशना शुरू किया और राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर कई मुकाम हासिल किए। अपने करियर में राजेश लगातार 4 बार नैशनल चैंपियन रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने स्ट्रांग मैन इंडिया का प्रतिष्ठित खिताब भी अपने नाम किया है। बीच में एक दौर ऐसा भी आया जब उनका चयन श्रीलंका में आयोजित विश्व स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वह हिस्सा नहीं ले पाए। हालांकि, इस झटके से टूटने की बजाय उन्होंने थाईलैंड में स्वर्ण जीतकर शानदार वापसी की।

युवाओं को दिया नशे से दूर रहने का संदेश

आज राजेश ठाकुर चंबा और प्रदेश के युवाओं के लिए एक यूथ आइकॉन बन चुके हैं। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। राजेश ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि खेल युवाओं को एक सही और सकारात्मक दिशा देते हैं। खेल अनुशासन सिखाते हैं और युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रखते हैं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा महंगे संसाधनों की नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प की मोहताज होती है।

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