सरकार के आदेशों के इंतजार में ड्राईवर गोपाल ठाकुर ने 28 दिन पीरन गांव में खड़ी बस की चौकीदारी करते बीता दिए । परंतु इनकी परेशानी को सुनने वाला कोई नहीं । मण्डी जिला के खलोहड़ गांव के रहने वाले गोपाल कोरोना के इस संकट के दौरान अपने परिवार को मिलने को तरस गए हैं । गोपाल का कहना है कि लॉकडाउन के आदेश के उपरांत गत 21 मार्च से वह पीरन में खड़ी बस में जीवन बिता रहे हैं और इन्हें 3 मई के उपंरात भी वापिस अपने परिवार से मिलने की भी उमीद नहीं है । इनका कहना है कि वह बस को छोड़ कर कहीं भी नहीं जा सकते हैं और निगम के अधिकारी स्टॉफ को फील्ड में पेश आ रही समस्या बारे चिंतित नहीं हैं ।
गौर रहे कि निगम के अधिकारियों द्वारा लॉकडाउन की अधिसूचना के दौरान दूरदराज पहाड़ी क्षेत्रों में फंसी बसों को वापिस मुख्यालय नहीं बुलाया गया जिस कारण गोपाल की तरह न जाने कितने एचआरटीसी के ड्राईवर कोरोना के इस संकट में घर से बाहर रहकर परेशानी झेल रहे हैं । ड्राईवर गोपाल का कहना है कि कोविड-19 की सजा उन्हें बेवजह मिल रही है। यहां तक की इनके पास कपड़े तक भी बदलने को नहीं है और भोजन के लिए भी गांव के लोगों पर निर्भर होना पड़ रहा है । इनका यह भी कहना है कि रोजमर्रा के खर्चे को भी पैसे जेब में नहीं रहे हैं क्योंकि गांव में एटीएम इत्यादि की कोई सुविधा नहीं होती है । गोपाल का कहना है कि सभी विभागों के कर्मचारी इस संकट के दौर में अपने परिवार के साथ जीवन यापन कर रहे हैं परंतु उन्हें 3 मई तक बस में ही समय बिताना पड़ेगा ।












