ADVERTISEMENT

हिमाचल हाई कोर्ट बड़ी महिला अधिकारी के रवैये से नाराज, जानें क्यों अदालत ने लगाई फटकार

Khabron wala

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक मामले में प्रतिवादी राज्य सरकार के स्वास्थ्य सचिव को बिना नोटिस दिए छुट्टी चले जाने पर फटकार लगाई है. हिमाचल हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार के सचिव के इस व्यवहार को अस्वीकार्य बताया है. अदालत ने पाया कि प्रतिवादी स्वास्थ्य सचिव की ओर से उपस्थित न रहने को लेकर पहले कोई एप्लीकेशन फाइल नहीं की गई थी और सुनवाई से पहले अधिकारी छुट्टी पर चले गए. अदालत ने अधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा कि उच्च पदस्थ अधिकारी से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती.

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में प्रदेश सरकार की हेल्थ केयर स्कीम हिमकेयर और आयुष्मान भारत के लंबित भुगतान से जुड़े मामले में न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत सुनवाई कर रही है. शुक्रवार को सुनवाई से पहले ही मामले में प्रतिवादी स्वास्थ्य सचिव छुट्टी पर चले गए. अदालत ने पाया कि राज्य सरकार के स्वास्थ्य सचिव सुनवाई से एक दिन पहले 9 अप्रैल से 18 अप्रैल तक छुट्टी पर चले गए हैं. लेकिन, अधिकारी की ओर से अदालत में उपस्थित न होने को लेकर कोई एप्लीकेशन फाइल नहीं की गई. न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ ने अपने लिखित आदेशों में कहा कि मामले की सुनवाई से पहले बिना किसी छूट (एक्जेम्प्शन) का आवेदन प्रस्तुत किए ही प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य सचिव छुट्टी पर चले गए, जबकि आदेश में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया है. इस प्रकार अवकाश पर चले जाने की प्रथा किसी उच्च पदस्थ अधिकारी से अपेक्षित नहीं है.

क्या है मामला

दरअसल, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में हिमकेयर और आयुष्मान भारत के लंबित भुगतान से संबंधित जुड़े हुए मामले विचाराधीन है. मातृ मेडिसिटी एंड ऑर्थोकेयर हॉस्पिटल बनाम स्टेट ऑफ हिमाचल प्रदेश और अन्य के साथ जुड़े 21 अन्य मामलों पर जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल बेंच सुनवाई कर रही है. मामले में अब तक दोनों पक्षों की ओर से आर्गुमेंट किए गए हैं. अब अदालत ने हिमाचल सरकार से अगली सुनवाई पर मामले से जुड़ा विस्तृत डाटा रिकॉर्ड हाईकोर्ट के समक्ष रखने के निर्देश दिए हैं.

इस मामले में अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होनी है. अदालत में राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले योजना से जुड़े विस्तृत डाटा रिकॉर्ड अदालत के समक्ष रखने को कहा है. राज्य सरकार को योजना के तहत पैनल में शामिल याचिकाकर्ता अस्पतालों और संस्थानों से संबंधित पूरी जानकारी प्रस्तुत करनी होगी. साथ ही अस्पतालों द्वारा जमा किए गए बिलों की तिथियां और उनका पूरा विवरण भी देना होगा. इसके अलावा अदालत ने बिलों पर विचार और उनकी जांच की तिथियां भी रिकॉर्ड पर रखने को कहा है. राज्य सरकार से स्वीकृत व अस्वीकृत बिलों और स्वीकृत बिलों की राशि और भुगतान जारी करने की तिथियां बताने के साथ-साथ राज्य सरकार से लंबित भुगतान का ब्यौरा और उसके कारण भी पूछे गए हैं. अब इन सब का जवाब राज्य सरकार को अगली सुनवाई पर देने अदालत में देना होगा.

Related Posts

Next Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!