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हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। अब राज्य के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज और एमआरआई, सीटी स्कैन जैसी महंगी जांचों के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली जैसे बड़े शहरों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। आम जनता की इस परेशानी को दूर करने के लिए राज्य सरकार जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के स्वास्थ्य ढांचे का बड़े पैमाने पर कायाकल्प करने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश के प्रमुख अस्पतालों में अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं और मशीनें स्थापित करने का एक बड़ा ऐलान किया है।
बैठक में लिए गए फैसलों के अनुसार अब मरीजों को घर-द्वार के नजदीक ही आधुनिक जांच की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर, कुल्लू, ऊना, सोलन, धर्मशाला और पालमपुर के साथ-साथ जिला अस्पताल किन्नौर और मेडिकल कॉलेज नाहन में 1.5 टैस्ला एमआरआई मशीनें स्थापित की जाएंगी। वहीं, विशेषज्ञ जांच के लिए प्रदेश के सभी 7 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 3 टैस्ला एमआरआई मशीनें लगाई जा रही हैं। इसके अलावा सुपर स्पैशलिटी अस्पताल चमियाणा, आईजीएमसी शिमला, टांडा मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर मेडिकल कॉलेज और नेरचौक मेडिकल कॉलेज में बेहद आधुनिक 256-स्लाइस हाई-एंड सीटी स्कैन मशीनें लगेंगी, जो गंभीर बीमारियों की सटीक पहचान करने में मील का पत्थर साबित होंगी।
महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने स्तन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की समय पर पहचान के लिए नाहन, हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन और धर्मशाला के अस्पतालों में डिजिटल मैमोग्राफी मशीनें स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। इसके साथ ही विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों को डिजिटल एक्स-रे और 4डी अल्ट्रासाऊंड मशीनें भी उपलब्ध करवाई जाएंगी। वहीं, प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम क्षेत्रों के मरीजों की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए सरकार 42 हैंडहेल्ड (पोर्टेबल) एक्स-रे मशीनें खरीद रही है, जिनमें से 14 मशीनें राज्य को प्राप्त भी हो चुकी हैं। इन पोर्टेबल मशीनों का इस्तेमाल मुख्य रूप से छाती की जांच और टीबी की जल्द पहचान के लिए किया जाएगा, ताकि दूरदराज के मरीजों का समय पर उपचार शुरू हो सके।
मरीजों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, इसके लिए मुख्यमंत्री सुक्खू ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी चिकित्सा उपकरणों की खरीद नई दिल्ली स्थित एम्स के मानकों के बिल्कुल अनुरूप ही होनी चाहिए। इसके साथ ही सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के रेडियोलॉजी विभागों को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीशियनों की भर्ती प्रक्रिया की भी गहन समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि इस भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है और जल्द ही सभी सातों सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में पर्याप्त स्टाफ तैनात कर दिया जाएगा, साथ ही अच्छी गुणवत्ता वाली दवाइयों की खरीद प्रक्रिया को भी जल्द पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की इस अहम बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, मुख्य सचिव केके पंत, प्रधान सचिव एम. सुधा देवी और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक प्रदीप ठाकुर और स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक डॉ. गोपाल बेरी सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया और इन महत्वपूर्ण फैसलों की रूपरेखा तैयार की।











