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प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी को निलंबित करने से पहले कारण बताओ नोटिस जारी करना अनिवार्य नहीं है। याचिकाकर्त्ता रवि द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने कहा कि निलंबन कोई दंड नहीं है। याचिकाकर्त्ता ने प्राधिकारी द्वारा पारित निलंबन आदेश को इस आधार पर चुनौती दी थी कि उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही विचाराधीन है। कोर्ट ने याचिकाकर्त्ता से निलंबन आदेश के विरुद्ध याचिका की गुणवत्ता पर सवाल किया था कि जब यह स्थापित कानून है कि निलंबन कोई दंड नहीं है तो यह याचिका कैसे मान्य है।
याचिकाकर्त्ता का कहना था कि उसे निलंबित करने के कारण पूरी तरह से निराधार हैं, क्योंकि याचिकाकर्त्ता आऊटसोर्स कर्मचारियों को वेतन भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं था। यह भी तर्क दिया गया था कि याचिकाकर्त्ता को निलंबित करने से पहले कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह वह चरण नहीं है, जब न्यायालय याचिकाकर्त्ता की उन आधारों के संबंध में दोषसिद्ध के मुद्दे पर विचार करे, जिन पर अनुशासनात्मक प्राधिकारी की इच्छा होने पर याचिकाकर्त्ता के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की जा सकती है।











