Khabron wala
हिमाचल प्रदेश में नगर निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले नया मोड़ आ गया है. स्थानीय शहरी निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में विधायक फिलहाल मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है.
इससे पहले मामले पर सुनवाई करते हुए हिमाचल हाईकोर्ट ने विधायकों के वोट देने के अधिकार पर अंतिम रोक लगा रखी है. इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट से सरकार अंतरिम राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब संबंधित क्षेत्र के विधायक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में अपना मत डाल सकेंगे.
हिमाचल प्रदेश के शहरी निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में स्थानीय विधायकों के मताधिकार का मामला हिमाचल हाईकोर्ट में विचाराधीन है? मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होनी है. इससे पहले मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगा दी. इससे पहले हिमाचल हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार की 26 जुलाई 2023 की अधिसूचना पर अंतिम रोक लगा थी. इस अधिसूचना में राज्य सरकार ने स्थानीय शहरी निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए संबंधित विधायकों को वोट का अधिकार दिया गया था.
अधिवक्ता नंद लाल ठाकुर ने बताया, ‘पार्षदों की संख्या बराबर होने या एक से दो सीटों का अंतर होने की स्थिति में विधायकों का वोट निर्णायक हो जाता था. कानूनन नगर निकाय में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनने का अधिकार पार्षदों का है. ऐसे में विधायकों को यह अधिकार देना कानूनी रूप से उचित नहीं है’.










