स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार पर बिजली काटना गलत, कोर्ट ने पुराने मीटर पर आपूर्ति बहाल करने के दिए आदेश

Khabron wala 

स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर उपभोक्ताओं और बिजली बोर्ड के बीच चल रही खींचतान के बीच हमीरपुर की सिविल कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है. कोर्ट नंबर-3 की सिविल जज टीना मल्होत्रा ने लंबलू क्षेत्र के एक दुकानदार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसईबीएल) को 10 दिन के भीतर पुराने मीटर के माध्यम से बिजली आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए हैं.

अदालत ने प्रथम दृष्टया में उपलब्ध रिकॉर्ड और सरकारी स्पष्टीकरणों के आधार पर माना कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया स्वैच्छिक प्रतीत होती है और किसी उपभोक्ता पर इसे जबरन थोपने के लिए बिजली आपूर्ति काटने जैसा दबाव नहीं बनाया जा सकता. ये मामला लंबलू निवासी जैमल सिंह की ओर से दायर याचिका से जुड़ा हुआ है. याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि बिजली बोर्ड की ओर से स्मार्ट मीटर लगाने के संबंध में नोटिस जारी किया गया था. आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगवाने से इनकार करने पर बिजली आपूर्ति काटने की चेतावनी दी गई. इसके बाद मामला अदालत में विचाराधीन होने के बावजूद संबंधित दुकान का बिजली कनेक्शन काट दिया गया. इस पर याचिकाकर्ता ने अदालत से हस्तक्षेप कर बिजली आपूर्ति बहाल करवाने की मांग की.

बिजली बोर्ड और याचिकाकर्ता ने कोर्ट में रखा पक्ष

मामले की सुनवाई के दौरान बिजली बोर्ड की ओर से अदालत के समक्ष तर्क दिया गया कि राज्य सरकार की नीति और बिजली अधिनियम की धारा-55 के तहत उपभोक्ताओं को सही और निर्धारित मानकों वाले मीटर के माध्यम से ही बिजली आपूर्ति दी जा सकती है. बोर्ड की ओर से कहा गया कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया सरकार की नीति का हिस्सा है और इसी के तहत पुराने मीटरों को बदलने का कार्य किया जा रहा है. वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से बिजली बोर्ड की कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा गया कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य नहीं, बल्कि स्वैच्छिक है. याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार करने के आधार पर किसी उपभोक्ता की बिजली आपूर्ति काटना कानून के अनुरूप नहीं है. यह भी कहा गया कि उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर लगवाने के लिए बिजली कनेक्शन काटने की चेतावनी देकर मजबूर नहीं किया जा सकता.

दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया सरकारी स्पष्टीकरणों और दस्तावेजों से स्मार्ट मीटर लगाने की योजना स्वैच्छिक प्रतीत होती है. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी उपभोक्ता पर स्मार्ट मीटर लगवाने के लिए बिजली आपूर्ति काटने जैसा दबाव नहीं बनाया जा सकता. सिविल कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा-151 के तहत अपने अंतर्निहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए एचपीएसईबीएल को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता की दुकान की बिजली आपूर्ति 10 दिन के भीतर पुराने मीटर के माध्यम से पूर्ववत बहाल की जाए. अदालत की ओर से की गई ये व्यवस्था मुख्य वाद का अंतिम फैसला आने तक प्रभावी रहेगी.

मुख्य मामले की कोर्ट में जारी रहेगी सुनवाई

हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि अंतरिम आदेश में की गई टिप्पणियां केवल संबंधित आवेदन के निस्तारण के उद्देश्य से हैं. इन टिप्पणियों को मुख्य वाद के गुण-दोष या अंतिम निर्णय पर अदालत की राय नहीं माना जाएगा. मुख्य मामले की सुनवाई अदालत में अलग से जारी रहेगी. स्मार्ट मीटर को लेकर जारी विवाद के बीच हमीरपुर सिविल कोर्ट का यह अंतरिम आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, यह फैसला फिलहाल संबंधित याचिकाकर्ता के मामले में अंतरिम राहत के तौर पर दिया गया है और स्मार्ट मीटर से जुड़े व्यापक कानूनी एवं नीतिगत मुद्दों पर मुख्य वाद का अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है.

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