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करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र विख्यात शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी में साक्षात लक्ष्मी का वास है. हिमाचल के सबसे समृद्ध मंदिर मां चिंतपूर्णी में भेंट किए गए पैसों से खरीदी गाड़ियों के दुरुपयोग को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई थी. हाईकोर्ट की सख्ती के बाद ऊना के डीसी व पुलिस विभाग की तरफ से प्रयोग की जा रही गाड़ियां वापस मां चिंतपूर्णी ट्रस्ट को सौंप दी गई हैं. हिमाचल हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बारे में सख्त आदेश पारित कर सरकार को मंदिर की संपत्ति के दुरुपयोग पर चेताया था. उल्लेखनीय है कि हिमाचल में 36 मंदिर सरकार के अधीन हैं. यानी कुल 36 मंदिर सरकार ने अधिग्रहित किए हुए हैं. उनमें से सबसे अमीर मंदिर मां चिंतपूर्णी का है.
दरअसल, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें मां चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट के पैसे से खरीदी गई गाड़ियों के दुरुपयोग का मामला उठाया गया था. डीसी ऊना मंदिर के पैसे से खरीदी टोयोटा क्रिस्टा गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे थे. इसी प्रकार एक अन्य वाहन का प्रयोग पुलिस विभाग कर रहा था. पांच दिन के भीतर ये गाड़ियां वापस करने के आदेश जारी किए गए थे, जिसके बाद 23 अप्रैल को गाड़ियां ट्रस्ट को सौंप दी गईं.
यहां गौरतलब है कि इससे पहले अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश जारी कर मंदिरों की धनराशि को पुलों, सरकारी योजनाओं आदि पर खर्च करने पर रोक लगाई थी. साथ ही कहा था कि दानदाताओं का पैसा सिर्फ गो सेवा, धर्म-कर्म, वेद शिक्षा के प्रसार, यज्ञशालाओं आदि के निर्माण पर ही खर्च करने के आदेश दिए थे. हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से आदेश जारी किए थे कि मंदिरों के पैसों का प्रयोग केवल धार्मिक गतिविधियों व मंदिरों के विकास पर ही प्रयोग होगा. यही नहीं, मंदिर कमिश्नर सहित मंदिर अधिकारी आदि के लिए वाहन खरीदने पर तो सख्ती से रोक लगाई थी. मंदिर में आ रहे वीवीआईपी के लिए उपहार खरीदने, मंदिर की तस्वीर स्मृति चिन्ह पर पैसे खर्च करने को भी मना किया है. हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि दान का पैसा देवता का है न कि सरकार का.
एडवोकेट पंकज चौहान का कहना है, “सरकार के अधिग्रहण में जो मंदिर हैं, वे तय नियमों के साथ ही साधनहीन परिवार की बेटियों की शादी के लिए धन दे सकते हैं. इसके लिए एक प्रार्थना पत्र होता है. उसे संबंधित परिवार भर कर मंदिर के ट्रस्टी के कार्यालय में देता है, जिसके बाद पैसा जारी होता है. हाईकोर्ट का सख्त आदेश है कि अंतरजातीय विवाहों के लिए भी पैसा दिया जाए. साथ ही नेत्र शिविर व रक्तदान शिविर में पैसा लगाया जा सकता है. सिर्फ सरकारी योजनाओं के लिए मंदिर का पैसा खर्च नहीं किया जा सकता.”
शक्तिपीठ चिंतपूर्णी मंदिर के भंडार में साक्षात लक्ष्मी का निवास है. हिमाचल सरकार ने विधानसभा सत्र के दौरान बताया था कि मंदिर के भंडार में दो क्विंटल के करीब सोना है. मंदिर ट्रस्ट के पास 75 क्विंटल के करीब चांदी है. इसके अलावा सौ करोड़ रुपए से अधिक की एफडी है. कोरोना काल में चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट ने सरकार को पांच करोड़ रुपए की सहायता भी दी थी. मंदिर ट्रस्ट के पैसे से साधनहीन परिवारों की बेटियों की शादी को आर्थिक मदद की जाती है. विधानसभा में पेश किए गए पिछले रिकॉर्ड के अनुसार चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट ने दो साल में बेटियों की शादी के लिए 1.92 करोड़ रुपए की मदद की. साथ ही चिंतपूर्णी मंदिर परिसर के आसपास विकास कार्यों के लिए ट्रस्ट की तरफ से 18.57 करोड़ रुपए जारी किए थे. गरीब मरीजों के इलाज को भी पैसा जारी किया जाता है.
मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु चढ़ाते हैं सोना
चिंतपूर्णी मंदिर में श्रद्धालु मां की अनेक दिव्य लीलाओं पर श्रद्धा रखते हैं और मनोकामना पूरी होने पर आस्था के अनुरूप सोना-चांदी व धनराशि भेंट करते हैं. इसी साल फरवरी में पंजाब के एक भक्त परिवार ने इच्छा पूरी होने पर मंदिर में 25 तोले से अधिक सोने का गहना भेंट किया था. अप्रैल महीने में पंजाब के ही भक्त परिवार ने 11 तोले सोने का आभूषण मां के चरणों में अर्पित किया था. एक एनआरआई परिवार ने जनवरी में 26 तोले सोने का छत्र भेंट किया था. वहीं, सेना के एक अफसर ने सोने की नथ भेंट की थी. चार साल पहले एक परिवार ने सितंबर महीने में मां के चरण कमलों में सवा सौ ग्राम के करीब सोने के आभूषण भेंट किए थे.
अरबों के स्वामी हिमाचल के मंदिर
सरकारी अधिग्रहण वाले 36 मंदिरों के पास 4.4 अरब रुपए से अधिक की रकम तो केवल बैंक खातों में ही है. यदि छह फीसदी की ब्याज दर लगाई जाए तो केवल एक साल की ब्याज की रकम ही ढाई करोड़ रुपए से अधिक की होती है. इसके अलावा मां चिंतपूर्णी मंदिर के भंडार में सोने की कीमत ही पौने तीन अरब रुपए (सोने के दाम बदलते रहते हैं) बनती है. अन्य मंदिरों की बात करें तो मां नैना देवी के पास 1.80 क्विंटल सोना है. मां ज्वालामुखी मंदिर के पास करीब 24 किलो सोना है. मां चामुंडा देवी मंदिर कांगड़ा के पास 18 किलो सोना मौजूद है. उल्लेखनीय है कि सरकारी अधिग्रहण वाले मंदिर हिमाचल प्रदेश कला-संस्कृति व भाषा विभाग की देखरेख में रहते हैं. संबंधित जिला के डीसी मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख होते हैं. विभाग के अनुसार देखा जाए तो इस समय डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री के पास संबंधित विभाग है.
हिमाचल प्रदेश के कुल 36 मंदिर सरकारी अधिग्रहण वाले हैं. इनमें मां चिंतपूर्णी, मां ज्वालामुखी, मां श्री नैना देवी, मां चामुंडा देवी, मां वज्रेश्वरी देवी, सिद्ध बाबा बालकनाथ मंदिर, बैजनाथ महादेव, रामगोपाल मंदिर, बद्रीविशाल मंदिर, चौरासी टेंपल भरमौर, दुर्गा मां मंदिर हाटकोटी, मां तारा देवी मंदिर शिमला, महावीर हनुमान जाखू मंदिर, भीमाकाली मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर चंबा, भगवान त्रिलोकीनाथ मंदिर लाहौल-स्पीति, महामृत्युंजय मंदिर मंडी, नीलकंठ महादेव मंदिर मंडी आदि प्रमुख हैं










