नौणी यूनिवर्सिटी में नेतृत्व परिवर्तन: डॉ.एचएस बवेजा को कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार
डॉ.वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में नेतृत्व परिवर्तन के साथ बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। राज्यपाल एवं नौणी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति काविंद्र गुप्ता ने वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरमिंदर सिंह बवेजा को विश्वविद्यालय के कुलपति पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपने के आदेश जारी किए हैं। यह व्यवस्था 9 मई,2026 से प्रभावी होगी और नए नियमित कुलपति की नियुक्ति तक जारी रहेगी।
राजभवन सचिवालय से जारी आदेशों के अनुसार वर्तमान कुलपति प्रो. डॉ.राजेश्वर सिंह चंदेल का एक वर्ष का अतिरिक्त कार्यकाल 8 मई को समाप्त हो चुका है। इसके बाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। डॉ. बावेजा वर्तमान में फ्लोरीकल्चर एवं लैंडस्केप आर्किटेक्चर विभाग में प्रधान वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं और अब वे अपने मौजूदा दायित्वों के साथ कुलपति पद की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
प्रदेश के बागवानी और वानिकी क्षेत्र में अग्रणी पहचान रखने वाला नौणी विश्वविद्यालय लंबे समय से अनुसंधान, प्राकृतिक खेती, फल उत्पादन तकनीक और किसानोन्मुखी योजनाओं का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में कुलपति पद पर हुआ यह बदलाव अकादमिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
निवर्तमान कुलपति प्रो डॉ.राजेश्वर सिंह चंदेल के कार्यकाल को विश्वविद्यालय के विस्तार और नवाचारों के दौर के रूप में देखा जा रहा है। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों तक वैज्ञानिक तकनीक पहुंचाने और शोध गतिविधियों को नई दिशा देने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए। हिमाचल की बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी विश्वविद्यालय की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही।
विश्वविद्यालय में अब नए स्थायी कुलपति की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ शिक्षाविदों के नाम संभावित दावेदारों के रूप में सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गतिविधियां और तेज होंगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी इस बदलाव को अहम माना जा रहा है, क्योंकि हिमाचल की अर्थव्यवस्था में बागवानी क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका है और नौणी विश्वविद्यालय को इस क्षेत्र की नीतियों एवं अनुसंधान का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में विश्वविद्यालय के नेतृत्व में हुआ यह परिवर्तन प्रदेश के कृषि और बागवानी भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।











