अब जेलों से बाहर नहीं आएंगे गंभीर और संगीन अपराधों वाले आरोपी, कोर्ट में ऐसे होगी पेशी

Khabron wala 

हिमाचल में कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने तथा जेल से अदालतों में पेशी के दौरान होने वाली हिंसक वारदातों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रदेश के गृह विभाग द्वारा जारी नए आदेशों के तहत राज्य की जेलों में बंद गंभीर और संगीन अपराधों के आरोपियों को अब शारीरिक रूप से कोर्ट में पेश नहीं किया जाएगा। उनकी सभी पेशियां अनिवार्य रूप से वीडियो काॅन्फ्रैंसिंग के माध्यम से ही की जाएंगी। ये आदेश अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) कमलेश कुमार पंत द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 303(1) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किए गए हैं।

सरकारी आदेश के मुताबिक पिछले कुछ समय में प्रदेश में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां अपराधियों ने जेल से कोर्ट ले जाते समय अपने साथियों की मदद से पुलिस हिरासत से भागने का प्रयास किया और पुलिसकर्मियों पर हमले किए। कुछ मामलों में विरोधी गैंगों ने भी उन पर सरेआम हमला किया है। इन वारदातों में सार्वजनिक स्थानों और कोर्ट परिसरों में खुलेआम आग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल किया गया, जिससे आम जनता में डर का माहौल पैदा हुआ और सार्वजनिक शांति भंग हुई। इसी को देखते हुए यह बड़ा कदम उठाया गया है।

विशेष सचिव (गृह) दलीप कुमार ने इस आदेश की प्रतियां हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, पुलिस महानिदेशक, महानिदेशक (जेल), सभी जिला मैजिस्ट्रेटों और निदेशक अभियोजन को आगामी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी हैं, साथ ही इसे हिमाचल प्रदेश के राजपत्र में तुरंत प्रकाशित करने को कहा गया है। सरकार के इस कदम से जहां कोर्ट परिसरों की सुरक्षा अभेद्य होगी, वहीं भारी-भरकम पुलिस बल को कैदियों के परिवहन के जोखिम से भी मुक्ति मिलेगी।

इन 7 श्रेणियों के कैदियों पर लागू होगा आदेश

देश विरोधी व आतंकी गतिविधियां: यूएपीए, 1967 और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 के तहत दर्ज आरोपी।

संगठित अपराध: बीएनएस की धारा 111 के तहत संगठित अपराध या धारा 113 के तहत आतंकी कृत्य करने वाले।

सीरियल किलर व हत्यारे: सीरियल किलर, 2 या 2 से अधिक मर्डर केस (धारा 103 बीएनएस) या हत्या के प्रयास (धारा 109 बीएनएस) के आरोपी।

ड्रग्स तस्कर: एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत व्यावसायिक मात्रा के साथ पकड़े गए या बार-बार अपराध करने वाले तस्कर।

गैंगस्टर्स व डकैत: नामी गैंगस्टर्स, सुपारी देकर हत्या करवाने वाले, हिंसक लुटेरे, डकैती और जबरन वसूली के आरोपी, जिन्होंने आर्म्स एक्ट (हथियार कानून) का उल्लंघन किया हो।

राज्य के विरुद्ध अपराध: भारतीय न्याय संहिता 2023 के अध्याय 7 और धारा 160 बीएनएस के तहत आरोपी।

पॉक्सो व दुष्कर्म के आरोपी: पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) व 6 और बीएनएस की धारा 65(1), 65(2), 66 व 70 के तहत आने वाले गंभीर यौन अपराधी।

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