Paonta Sahib: यमुना पुल की मरम्मत के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को 22 करोड़ रुपये का बजट हुआ स्वीकृत ….
पांवटा साहिब-विकासनगर-देहरादून नेशनल हाईवे-707 पर सफर करने वाले करीब 50 हजार रोजाना यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। ओवरलोड टिप्परों की आवाजाही और यमुना में हो रहे अवैध खनन के कारण जर्जर हो चुके लगभग 60 साल पुराने ऐतिहासिक यमुना पुल की मरम्मत और यमुना पुल से भूपपुर चौक तक क्षतिग्रस्त सड़क के सुधार के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को कुल 22 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है।इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिशासी अभियंता राकेश खंडूजा ने बताया कि सात करोड़ रुपये से पुल की मरम्मत का काम होगा व 15 करोड़ रुपये से यमुना पुल से भूपपुर चौक तक एनएच का काम पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रालय से बजट की मंजूरी मिलते ही विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। 15 से 20 दिन में टेंडर अवार्ड कर धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा। पहला फोकस मानसून से पहले पुल के खतरनाक गड्ढों और सड़क के सबसे खराब हिस्सों को दुरुस्त करने पर है। पूरा काम 6 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
60 साल पुरानी लाइफलाइन कैसे हुई जर्जर_
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, करीब 1970 में बना यह पुल हिमाचल और उत्तराखंड को जोड़ने वाली लाइफलाइन है।लगभग 60 साल पुराना यह पुल अब अपनी उम्र पूरी कर चुका है, लेकिन पिछले 8-10 सालों से हालात ज्यादा बिगड़ गए। यमुना नदी में स्टोन क्रशर के लिए हो रहे अंधाधुंध अवैध खनन ने पुल की नींव हिला दी। खनन माफिया रात के अंधेरे में पुल के पिलरों के 50 मीटर दायरे में भी जेसीबी-पोकलेन से खनन करते रहे, जिससे नदी का बहाव सीधे पिलरों से टकराने लगा। सिंचाई विभाग की 2024 की रिपोर्ट में भी माना गया था कि खनन से पिलर नंबर 3 और 4 के नीचे 2 मीटर तक कटाव हो चुका है।
दूसरी ओर, पुल से रोजाना गुजरने वाले 18-20 टायर वाले ओवरलोड टिप्परों ने रही-सही कसर पूरी कर दी। 25 टन क्षमता वाले इस 60 साल पुराने पुल से 40-50 टन वजन के टिप्पर धड़ल्ले से गुजरते हैं। नतीजा- पुल की स्लैब जगह-जगह से धंस गई, एक्सपेंशन ज्वाइंट टूट गए और डामर की परत पूरी तरह उखड़ गई। मौजूदा समय में पुल पर 4 से 6 इंच तक गहरे और 2 फीट चौड़े गड्ढे हैं। बाइक-स्कूटर सवार आए दिन इन गड्ढों में गिरकर घायल हो रहे हैं।
7 करोड़ से होगा 60 साल पुराने पुल का जीर्णोद्धार_
एनएच विभाग के एक्सियन ने बताया कि 7 करोड़ की डीपीआर में पुल की पूरी ओवरहालिंग शामिल है। सबसे पहले सभी गड्ढों को हाई-स्ट्रेंथ कंक्रीट से भरा जाएगा। पुल के सभी 8 एक्सपेंशन ज्वाइंट को नए मॉड्यूलर ज्वाइंट से बदला जाएगा। टूटी हुई रेलिंग और फुटपाथ का नए सिरे से निर्माण होगा। पुल की नींव को मजबूत करने के लिए पिलरों के चारों ओर 5 मीटर तक क्रेट वर्क और बोल्डर की लाइनिंग की जाएगी। काम पूरा होने के बाद आईआईटी रुड़की से पुल की लोड टेस्टिंग भी करवाई जाएगी और नई भार क्षमता के बोर्ड लगाए जाएंगे। विभाग का दावा है कि मरम्मत के बाद यह 60 साल पुराना पुल अगले 15-20 साल तक और चल सकेगा।
15 करोड़ से बदलेगी भूपपुर रोड की सूरत_
यमुना पुल से भूपपुर चौक तक करीब 2.5 किमी का हिस्सा सबसे ज्यादा खस्ताहाल है। 15 करोड़ के बजट से यहां पूरी सड़क को स्क्रैप कर 50 एमएम मोटी डामर की नई परत बिछाई जाएगी। बातापुल से भूपपुर चौक तक सड़क को 7 मीटर से 10 मीटर चौड़ा किया जाएगा। जलभराव की समस्या खत्म करने के लिए दोनों ओर आरसीसी नालियां बनेंगी। सड़क के 3 ब्लैक स्पॉट्स पर क्रैश बैरियर, कैट आई और रिफ्लेक्टर लगाए जाएंगे। स्ट्रीट लाइट के लिए भी प्रावधान किया गया है।
10 साल से मांग रहे थे लोग, अब मिली राहत_
पांवटा व्यापार मंडल के अध्यक्ष अनिंदर सिंह नोटी ने कहा कि हम 2016 से इस 60 साल पुराने पुल और सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, सांसद सुरेश कश्यप और विधायक सुखराम चौधरी को 20 से ज्यादा ज्ञापन दिए। खराब सड़क के कारण पांवटा का व्यापार 30% तक गिर गया था। अब 22 करोड़ का बजट मंजूर होना बड़ी जीत है।इस प्रोजेक्ट से पांवटा साहिब, बद्रीपुर, भूपपुर, माजरा, भरली, शिवपुर, विकासनगर, हरबर्टपुर और देहरादून अप-डाउन करने वाले कर्मचारियों, छात्रों, व्यापारियों और मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। हिमाचल पथ परिवहन की 40 से ज्यादा बसें इसी रूट से गुजरती हैं। एंबुलेंस का आवागमन भी सुगम होगा। समय की बचत के साथ-साथ वाहन रिपेयर का खर्च भी बचेगा और सड़क हादसों में 70% तक कमी आने की उम्मीद है।









