जी हां एसडीम साहब अपने कुछ चमचों को लेकर शहर में स्वच्छता अभियान चलाने की बातें कर रहे हैं तथा आलीशान दफ्तरों में बैठकर पावटा साहिब को चमकाने के सपने देख रहे हैं वहीं दूसरी ओर शहर में स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ रही है चारों तरफ गंदगी का आलम है वहीं डीसी साहब स्वच्छता अभियान को लेकर शहर में आने वाले हैं
शायद राष्ट्रीय स्तर पर पावटा साहिब जो की ऐतिहासिक नगरी मीडिया के द्वारा देश में यही संदेश जाएगा कि अधिकारी केवल अपना दफ्तरों में बैठकर भाषण देने लायक है तथा ग्राउंड लेवल पर गंदगी का आलम है वही सरकार टैक्स के रूप में गौशाला के लिए पैसे इकट्ठे करने में जुटी है वहीं शहर में आवारा पशुओं की भरमार है |एसडीएम ऑफिस के चंद कदमों से दूर शायद कभी एसडीम साहब अपने चमचों को लेकर एक चक्कर ग्राउंड का भी लगा लेते तो उनको गंदगी दिख जाती वही शहर में प्रशासन की किरकिरी हो रही है कि शहर में गंदगी भरी पड़ी है तथा जनता त्रस्त है
वही मिली जानकारी के अनुसार वन विभाग भी नगरपालिका पर अपना डंडा चला कर दिखाना चाहता है कि हमारी जमीन पर गंदगी ना डंप करें वहीं नगरपालिका का जवाब है कि जब हम 50 साल से यमुना किनारे कूड़ा करकट गिरा रहे हैं तो 1 साल हो और गिरने दिया जाए इस मामले में डीएफओ का कहना है कि किसी भी कीमत पर नगरपालिका को कूड़ा वन विभाग की भूमि पर नहीं गिराने दिया जाएगा वहीं नगरपालिका के ईओ का कहना है कि वन विभाग को यह बात पिछले 50 साल से क्यों याद नहीं आई जबकि डंपिंग साइट का काम चला हुआ है तथा शीघ्र पूरा हो जाएगा अभी सारे खेल में देखना है कि एनजीटी का रुख क्या रहेगा पर इस सारी बात का निष्कर्ष यही निकलता है कि विभागों विभागों की लड़ाई में पिसना तो जनता को है











