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विजय रघुवंशी के खिलाफ संस्थागत उत्पीड़न जारी, निजी जानकारी के दुरुपयोग का आरोप l

विजय रघुवंशी के खिलाफ संस्थागत उत्पीड़न जारी, निजी जानकारी के दुरुपयोग का आरोप l

मेडिकल जांच पर बड़ा सवाल: एक दिन में दो बार मेडिकल बोर्ड का गठन, मेडिकल जांच शुरू तक नहीं—अब तीसरी बार तैयारी! विजय रघुवंशी ने लगाए लगातार प्रतिकूल यातना के आरोप।

शिमला। एक ही दिन में दो बार चिकित्सा मंडल गठित हुआ, अधिकारी घंटों अस्पताल में मौजूद रहे, लेकिन चिकित्सकीय जांच शुरू तक नहीं हो सकी—और अब फिर से चिकित्सा मंडल गठित किए जाने की तैयारी है। पुलिस अधिकारी विजय रघुवंशी ने इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव को शिकायत भेजी है। उनका आरोप है कि बार-बार मंडल गठित किए जाने की कवायद सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर उनके विरुद्ध “पसंद की चिकित्सकीय राय” हासिल करने की कोशिश हो सकती है।

रघुवंशी के अनुसार, वह 16 सितंबर को सुबह करीब नौ बजे चिकित्सा मंडल के समक्ष उपस्थित हुए और शाम करीब छह बजे तक अस्पताल में रहे। इसके बावजूद दिनभर की इस कवायद के बाद उनकी चिकित्सकीय जांच पूरी नहीं हो सकी। उनका कहना है कि उन्हें घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ी, जबकि वह पहले से चिकित्सकीय प्रतिबंधों के अधीन हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब एक ही दिन में दो बार गठित चिकित्सा मंडल उनकी जांच शुरू तक नहीं कर सका, तो दोबारा मंडल गठित करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? रघुवंशी ने अपनी शिकायत में इसी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में रखा है और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

रघुवंशी ने आरोप लगाया है कि उनके उपचार से संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय के विपरीत “पसंद की राय” हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उनकी आशंका है कि ऐसी राय को आगे विभागीय कार्रवाई अथवा निलंबन का आधार बनाया जा सकता है। उन्होंने इस आरोप को जांच का विषय बताते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

उन्होंने कहा है कि इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, शिमला के विशेषज्ञ चिकित्सक उनकी रीढ़ की चोट के उपचार के दौरान लंबे समय तक बैठने से बचने और पर्याप्त विश्राम की सलाह दे चुके हैं। ऐसे में उनकी चिकित्सकीय पाबंदियों की वास्तविकता पर बार-बार सवाल उठाए जाने को उन्होंने गंभीर उत्पीड़न के रूप में देखा है।

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब रघुवंशी के अनुसार उनकी निजी चिकित्सकीय जानकारी और उनसे संबंधित आधिकारिक दस्तावेज सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हो गए। उनका आरोप है कि अभिलेखों के संरक्षक के पास सुरक्षित रहने वाले दस्तावेजों का इस्तेमाल उन्हें नकारात्मक और दिखावटी व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करने तथा सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के लिए किया गया।

रघुवंशी ने कहा है कि व्यक्तिगत और चिकित्सकीय जानकारी का इस प्रकार सार्वजनिक होना उनकी निजता, गरिमा और प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है। उन्होंने संबंधित सामग्री के मूल स्रोत, उसे सार्वजनिक करने वाले व्यक्ति तथा उसके प्रसार की पूरी श्रृंखला की जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने मुख्य सचिव से चिकित्सा मंडल की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच, सभी संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखने तथा निजी चिकित्सकीय जानकारी के कथित अनधिकृत प्रसार की जांच कराने का आग्रह किया है। रघुवंशी की आशंका है कि चिकित्सा मंडल की बार-बार की कवायद और निजी दस्तावेजों के सार्वजनिक होने की घटनाएं उनके विरुद्ध चल रहे संस्थागत उत्पीड़न की कड़ियां हो सकती हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

रघुवंशी ने यह भी मांग की है कि जब तक उनकी चिकित्सकीय स्थिति का स्वतंत्र और निष्पक्ष आकलन नहीं हो जाता, तब तक किसी विवादित अथवा अप्रमाणित चिकित्सकीय राय के आधार पर उनके विरुद्ध प्रतिकूल विभागीय कार्रवाई की आशंका व्यक्त की है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम में जिम्मेदारी तय करने और यदि किसी स्तर पर जानबूझकर उन्हें अपमानित अथवा लक्षित करने के लिए आधिकारिक सामग्री का दुरुपयोग का मामला बनता । कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।

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