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हिमाचल से शनिवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पूरी तरह से विदाई ले ली है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार इस साल मानसून अपने तय समय 25 सितम्बर से आठ दिन की देरी से लौटा है। हालांकि, पूरे सीजन में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहा, लेकिन मानसूनी आपदाओं ने प्रदेश को गहरे घाव दिए हैं। सवा तीन महीने के इस मानसूनी दौर में बारिश से जुड़े हादसों में 380 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
प्रदेश में 1 जून से 30 सितम्बर तक कुल 652.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 734.4 मिलीमीटर से 11 फीसदी कम है। हालांकि, मौसम विभाग इसे सामान्य श्रेणी में ही मानता है। पिछले 125 वर्षों में यह 41वीं सबसे कम मानसूनी बारिश है। मानसून के दौरान केवल जुलाई माह में सामान्य से 6 फीसदी अधिक बारिश हुई। वहीं, जून में 36 फीसदी, अगस्त में 17 और सितम्बर में 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। लाहौल-स्पीति में बारिश की अत्यधिक कमी और हमीरपुर में कमी रही। शिमला, किन्नौर, कुल्लू सहित बाकी 10 जिलों में बारिश सामान्य रही।
10 जुलाई को सिरमौर जिला में अत्यधिक भारी बारिश का दौर देखा गया। बारिश भले ही 11 फीसदी कम हुई हो, लेकिन अचानक आई बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने प्रदेश को भारी वित्तीय और जानमाल की चपत लगाई है। प्रदेश को 3231 करोड़ का वित्तीय नुक्सान उठाना पड़ा है। 380 लोगों की दुखद मृत्यु के साथ-साथ सड़कों, पुलों, पेयजल योजनाओं और बिजली ट्रांसफार्मरों को व्यापक नुक्सान पहुंचा है। कई दुर्गम इलाकों में अभी भी कनैक्टीविटी और जलापूर्ति प्रभावित है।
मानसून की पूरी तरह से विदाई हो जाने के कारण आगामी दिनों में पूरे हिमाचल प्रदेश में मौसम के साफ और शुष्क रहने का पूर्वानुमान है। मौसम खुलने के साथ ही लोक निर्माण और जल शक्ति विभागों द्वारा क्षतिग्रस्त सड़कों की मुरम्मत और पेयजल व बिजली लाइनों को पूरी तरह से सुचारू करने के राहत व बहाली कार्यों में अब तेजी आएगी।









