भ्रष्टाचारियो के लिए स्वर्ग है पांवटा साहिब , पोस्टिंग के लिए कर्मचारी व अधिकारी रहते हैं कतार में

( जसवीर सिंह हंस ) सवाल उठ रहे है कि पांवटा साहिब में विभागों में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है | गोरतलब है कि पांवटा साहिब भ्रष्टाचारियो के लिए स्वर्ग बन गया है व पोस्टिंग के लिए सभी विभागों के कर्मचारी व अधिकारी कतार में रहते है व साम दाम दंड भेद कि निति अपनाकर यहाँ तबादला करवाने को आतुर रहते है | सभी विभागों के कर्मचारी व अधिकारी पांवटा साहिब में आकर खुश हो जाते है | व यहाँ कि पोस्ट को मलाईदार पोस्ट भी कहा जाता है | बेरियर पर तेनती के बाद कर्मचारी व अधिकारियो पर रोनक देखने वाली होती है |

त्योहारों से  पहले ही भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों के कमरों में गिफ्ट का ढेर लग जाता है पूरे साल अवैध कार्य करने के एवज में भी मोटे गिफ्ट इनके कमरों में पहुंचे होते हैं यही नहीं कुछ भ्रष्ट अधिकारी ड्रैग्ड अपनी कोठी या घर पर गिफ्ट पहुंचाने के लिए भी बोल देते हैं

यहाँ पर तेनात रह चुके व फिलहाल तेनात कई अधिकारियो ने अकूत सम्पति बना ली है | कई अधिकारियो व कर्मचारियों ने शिमला में नेताओ व अधिकारियो तक दिवाली व अन्य त्योहारों पर निरंतर बम पटाके गिफ्ट ,गुड ,शक्कर, स्ट्रॉबेर्री व सोमरस तक पहुचाये है | शिमला वाले नेताओ व अधिकारियो तक पहुच रखने वाले अधिकारी व कर्मचारियों ने आम आदमी का जीना दुर्भर कर दिया है रिश्वत देकर काम करवाने वाले लोगो कि दफ्तरों में तूती बोलती है |

 

वही विजिलेंस विभाग स्टाफ कि कमी को लेकर परेशान रहता है | वही शिकायत मिलने के इन्तजार में विजिलेंस विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है क्यूंकि जब तक कोई शिकायत नहीं होगी विजिलेंस विभाग कोइ कारेवाही नहीं कर सकेगा | विजिलेंस विभाग के अधिकारियो ने जनता से अपील कि है कि यदि कोई अधिकारी व कर्मचारी रिश्वत मांगता है तो उनकि शिकायत विजिलेंस विभाग को कि जाये |

भ्रष्टाचार का अर्थ रिश्वत लेना मात्र नहीं है इसके कई रंग रूप है यथा – मिलावट करना, समय में ड्यूटी पर ना जाना, जमाखोरी, कालाबाजारी, वस्तुएँ ऊँचे दाम पर बेचना, दूसरों का अधिकार हनन, कार्य के प्रति लापरवाही इत्यादिव्यक्ति का यह कर्म उसे धीरे-धीरे अपवित्रता के माया जाल में उलझा देता है। भ्रष्टाचारी स्वयं एक रोगी बनकर समाज और देश को नाश के रास्ते पर धकेल देता है। अतः शासन और प्रशासन की नींव कमजोर पड़ जाती है, और व्यक्ति समाज तथा देश की प्रगति की सभी आशा व सम्भावना धूमिल पड़ जाती है।

जहा एक और हाई कोर्ट के भ्रष्टाचारियों को चिन्हित करने के आदेशो के बाद भी प्रदेश में भर्ष्टाचार चरम सीमा पर है । वही सिस्टम को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार को एक्शन लेना चाहिए । मगर प्रश्न यह है कि एक्शन लेने की वह घड़ी कब आएगी?

जिस सतर्कता विभाग को मुख्यमंत्री भ्रष्टों को छांटने की नसीहत पिला रहे हैं, ऐसी मेहरबानियों की वजह से उस विभाग का न जाने कितनी बार मनोबल टूटा है। कई अफसरों के खिलाफ जांच चली लेकिन एक्शन लेने के बजाय इन दागी अफसरों को मलाईदार पोस्टिंग का ईनाम दिया गया।अब मसला भ्रष्टाचारियों को चिन्हित करने का नहीं है, दरअसल सरकार को यदि भ्रष्टाचार को खत्म करना है तो उसे भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ एक्शन लेना होगा। ये वक्त चिन्हित करने का नहीं एक्शन लेने का है।.

 

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