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बराड़ा से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक युवक ने युवती को कोल्ड ड्रिंक में जहर देकर मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद आरोपी ने शव को बैग में पैक किया और सीसीटीवी में कैद हुए रेहड़ी चालक की मदद से उसे कार तक पहुँचाया। वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपी शव को हिमाचल के सिरमौर ले गया, वहां पेट्रोल डालकर उसे आग लगा दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अधजली लाश बरामद कर ली है और रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
जानें बराड़ा की अमनदीप कौर हत्याकांड की पूरी कहानी
बराड़ा से शुरू हुई यह कहानी किसी डरावनी फिल्म के स्क्रीनप्ले जैसी लगती है, लेकिन हकीकत में यह एक कैंसर पीड़ित मां और एक बीमार बहन के सहारा छिन जाने की दास्तां है। 13 मई की वह सुबह इकतीस वर्षीय अमनदीप कौर के लिए किसी सामान्य दिन की तरह ही शुरू हुई थी, जब वह अपनी मां की मेडिकल रिपोर्ट लेने घर से निकली थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि घर से बावा लैबोरेट्री तक का वह छोटा सा सफर कभी खत्म नहीं होगा।
सीसीटीवी: जब धुंधली तस्वीरों ने राज उगलना शुरू किया
अमनदीप के अचानक गायब होने और फोन बंद आने पर जब परिजनों ने अपने स्तर पर तलाश शुरू की, तो सीसीटीवी फुटेज ने इस गुत्थी की पहली परत खोली। फुटेज में उसे आखिरी बार बराड़ा रेलवे स्टेशन के पास एक अंडरपास की तरफ जाते देखा गया। वहीं एक कमरे से संदिग्ध हालत में संदीप कुमार नाम का युवक बार-बार बाहर आता दिखा। सबसे चौंकाने वाला मंजर तब दिखा जब आरोपी ने एक भारी बैग रेहड़ी पर लादा और उसे एक कार में शिफ्ट कर दिया। इसी फुटेज ने पुलिस को संदिग्ध तक पहुंचने का मुख्य सुराग दिया। वहीं परिजनों ने पुलिस पर सहयोग नहीं करने के आरोप लगाये हैं।
धोखे की कोल्ड ड्रिंक और सिरमौर के जंगल
पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद आरोपी संदीप ने जो कबूलनामा किया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। डीएसपी सुरेश कुमार के मुताबिक आरोपी ने अमनदीप को जहर मिली कोल्ड ड्रिंक पिलाकर मौत के घाट उतार दिया। लेकिन जुर्म की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। सबूत मिटाने के लिए आरोपी लाश को कार में डालकर हिमाचल के सिरमौर जिले के घने जंगलों में ले गया। वहां उसने शव पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। पुलिस के अनुसार बरामद शव 95% तक जल चुका था, जिसे शिनाख्त के लिए सुरक्षित रखा गया है।
परिवार की एकमात्र उम्मीद का अंत
अमनदीप कौर सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि अपने घर की रीढ़ की हड्डी थी। पिछले साल पिता को खोने के बाद, उसने हिम्मत नहीं हारी और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर घर का खर्च उठा रही थी। उसकी मेहनत से ही उसकी मां का कैंसर का इलाज और छोटी बहन की मधुमेह की दवाइयां चल रही थीं। आरोपी संदीप, जो सोलर और बैटरी का काम करता था, उसने न केवल एक जान ली, बल्कि एक पूरे बेसहारा परिवार के जिंदा रहने की अंतिम उम्मीद को भी जलाकर राख कर दिया।










