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Himachal: अपनी सगी बेटी को भी नहीं छोड़ा, 3 साल तक करता रहा नीचता- मिली 20 साल की सजा

Khabron wala 

हिमाचल प्रदेश के जिला किन्नौर स्थित रामपुर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय यानी POCSO कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।

क्या है पूरा मामला?

आरोपी नेपाली मूल का बताया गया है और शिमला के आसपास के क्षेत्रों में रह रहा था। मामला नवंबर 2024 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता अपनी मां के साथ घटना से कुछ दिन पहले ही नेपाल से रिकांगपिओ आई थी। बच्ची के दिल में छेद होने के कारण उसकी मां उसे इलाज के लिए भारत लेकर आई थी।

लड़की के साथ कहां हुआ दुष्कर्म?

6 नवंबर 2024 को पीड़िता की मां काम की तलाश में बाहर गई थी। इसी दौरान नाबालिग पानी लेने के लिए एक झरने की तरफ गई। अभियोजन के मुताबिक, इसी दौरान आरोपी ने उसे अपने कमरे में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

लड़की ने किसे बताया सच?

घटना के बाद पीड़िता ने आरोपी के मोबाइल फोन से अपनी मां को जानकारी दी। सूचना मिलने पर उसकी मां ने एक नेपाली व्यक्ति को आरोपी के कमरे की ओर भेजा। वहां से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद कमरे का दरवाजा खोला गया।

इसके बाद पीड़िता की मां ने रिकांगपिओ थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया।

अदालत में कितने गवाहों ने दिया बयान?

मामले की जांच SI भरत सिंह ने की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में कुल 20 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मामले से जुड़े साक्ष्य भी पेश किए।

इन साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय, POCSO कोर्ट किन्नौर स्थित रामपुर ने आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे 20 वर्ष के कारावास के साथ पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

सगी बेटी का किया शोषण

इसी अदालत ने एक अन्य POCSO मामले में भी महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस मामले में एक व्यक्ति को अपनी नाबालिग बेटी का करीब दो से तीन वर्ष तक यौन शोषण करने का दोषी पाया गया। अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

नाबालिग पीड़िता की पहचान की सुरक्षा को देखते हुए आरोपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। दोनों मामलों में हिमाचल सरकार की ओर से उप जिला न्यायवादी कमल चंदेल ने अदालत में पैरवी की। अदालत के इन फैसलों के बाद POCSO मामलों में बच्चों की सुरक्षा और ऐसे अपराधों में प्रभावी कानूनी कार्रवाई को लेकर एक बार फिर ध्यान गया है।

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