ऊपमंडल संगड़ाह के अंतर्गत नौहराधार के साथ लगते गांव चोरास में फिश फार्म चला रहे विरेन्द्र सिंह द्वारा पाली जा रही दुर्लभ ट्राउट प्रजाति की मछलियां बिना दाने अथवा फीट के मरती जा रही है। विरेंद्र सिंह ने बताया कि, उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के दौरान मिले सरकारी पैसों से करीब 3 बीघाभूमि पर 12 यूनिट मछली पालन शुरू किया था, मगर मछलियों को दाना न मिलने से दिन प्रति दिन बेजुबान मछलिया मर रही है | जिसकी बजह से यह धंदा चोपट होता तो दिख ही रहा है, साथ साथ बेजुबान मछलिया मरने की चिंता खाए जा रही है।
मछली पालक वीरेंदर सिंह ने बयान में उन्होंने कहा कि, उनके पास 20,000 ट्राउड मछलियां है, जिनमें से करीब 500 मछली एक हप्ते में मर चुकी है। हिमाचल सरकार के मत्स्य पालन विभाग द्वारा उन्हें फिश फार्मिंग पर प्रशिक्षण कुल्लू जिला के पतली-कूहल व सिरमौर के राजगढ़ के अंतर्गत जदोल-टपरोली में भी दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि, हर रोज दो दर्जन के करीब मछलियां मरती जा रही है। संबंधित दस्तावेज की प्रति जारी करते हुए उन्होंने कहा कि, सोमवार से बुधवार तक वह तहसीलदार नौहराधार, एसडीएम संगड़ाह व उपायुक्त सिरमौर तीनों अधिकारियों के पास अनुमति के लिए व्हाट्सएप व अन्य माध्यम से आवेदन कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि, कुल्लू से राजगढ़ के गिरीपुल तक फिश फीड पंहुच चुकी है। उक्त मामले में सोमवार को विवाद बढ़ने के बाद संबंधित तहसीलदार द्वारा आवेदन के साथ वांछित दस्तावेज न होने अथवाऔपचारिकताएं पूरी न होने की बात कही गई थी। उसके बाद मंगलवार को एसडीएम संगड़ाह जो इंक्वायरी पर नौहराधार तहसील आए थे उनको भी मछली पालक वीरेंदर सिंह ने परमिशन के सारे कागजात दिए लेकिन उसके बावजूद एसडीएम संगड़ाह द्वारा आश्वासन दिया कि में अभी आपको व्हाट्सएप्प पर आपको परमिशन दे रहा हु | लेकिन उन्होंने बुधवार दिन में व्हाट्सएप्प पर एसएमएस कर दिया कि अब आपको उपायुक्त सिरमौर परमिशन देगे में नही दे सकता |
परमिशन न मिलने पर इस कोरोना वायरस के दौरान फैली बिमारी में खुद को हार मान चुके है कि न जाने प्रशासन उनको किउ परेशान कर रहा है | इस बारे बुधवार को एसडीएम संगड़ाह तथा उपायुक्त सिरमौर के मोबाइल नंबरों पर बात करने की बार बार कोशिश की गई पर सब व्यर्थ | सरकार के आदेशों की अवहेलना का आखिर कोन जिम्मेबार होगा | मछली पालक वीरेंदर सिंह ने मुख्यमंत्री तक अपना केस ले जाने की बात कही |












