मौसम की मार: शिमला में इस साल आधी रह सकती है सेब की पैदावार, 2.31 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान

Khabron wala 

मौसम की मार के चलते इस वर्ष शिमला जिले में सेब उत्पादन पिछले साल की तुलना में लगभग आधा रहने का अनुमान है। प्रशासन के अनुसार इस साल 2.31 लाख मीट्रिक टन सेब उत्पादन होने की संभावना है। सेब सीजन को सुचारू बनाने के लिए परिवहन, मालभाड़ा, श्रमिकों की उपलब्धता, नियंत्रण कक्ष और यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

मौसम की मार के कारण इस साल जिला शिमला में सेब का उत्पादन आधा रहने का अनुमान है। इस वर्ष जिले में महज 2.31 लाख मीट्रिक टन सेब उत्पादन का अनुमान है। यह पिछले साल 4.41 लाख मीट्रिक टन की तुलना में काफी कम है। शिमला में उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल बैठक में प्रशासन ने ये जानकारी दी।

बैठक में सेब परिवहन, यातायात प्रबंधन, मालभाड़ा निर्धारण, नियंत्रण कक्षों की स्थापना, श्रमिकों की उपलब्धता और पैकेजिंग सामग्री सहित विभिन्न व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सेब सीजन में बागवानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। साथ ही परिवहन एवं विपणन व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए।

बैठक में निर्णय लिया कि सभी एसडीएम अपने-अपने क्षेत्रों में बागवानों, ट्रक ऑपरेटरों और पिकअप यूनियनों के साथ बैठक कर परिवहन वाहनों की आवश्यकता का आकलन करेंगे। जरूरत पड़ने पर बाहरी जिलों और राज्यों से भी ट्रकों की व्यवस्था की जाएगी। सेब तुड़ान और ढुलाई के लिए पर्याप्त श्रमिकों की उपलब्धता को लेकर भी प्रशासन की ओर से इंतजाम किए जाएंगे। सेब सीजन के लिए मालभाड़ा निर्धारण को लेकर एसडीएम, डीएसपी, लोक निर्माण विभाग और एचआरटीसी के प्रतिनिधियों की समिति गठित की जाएगी।

बॉक्स के बजाय किलो में होगा सेब मालभाड़ा: उपायुक्त ने कहा कि सेब के मालभाड़े का निर्धारण बॉक्स के बजाय किलोग्राम और टन के आधार पर किया जाएगा। निर्धारित दरों को नियंत्रण कक्षों और प्रमुख स्थानों पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। सेब सीजन के दौरान मुख्य नियंत्रण कक्ष 15 जुलाई तक फागू में स्थापित किया जाएगा। यहां टेलीफोन, फैक्स, सीसीटीवी कैमरे और पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था रहेगी। भट्ठाकुफर मंडी में केवल नमूना बॉक्स ही दर निर्धारण के लिए लाए जाएंगे, जबकि सेब से लदे वाहन सीधे आढ़तियों के गोदामों तक जाएंगे।

चार पहिया वाहनों के लिए 200 रुपये पंजीकरण शुल्क: प्रशासन ने वाहनों के पंजीकरण शुल्क निर्धारित किए हैं। पिकअप एवं चार पहिया वाहनों के लिए 200 रुपये, ट्रक एवं छह पहिया वाहनों के लिए 500 रुपये तथा ट्रॉला और बड़े वाहनों के लिए 1000 रुपये शुल्क लिया जाएगा। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान लागू किया जाएगा। किसी भी ट्रक को शिमला शहर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा और उन्हें ढली-मैहली बाईपास मार्ग से भेजा जाएगा। सेब से लदे ट्रालों के ठियोग और शिमला के बीच सुबह 5 बजे से रात 9:30 बजे तक आवागमन पर रोक रहेगी।

Related Posts

Next Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!