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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. स्टोन क्रशर इंडस्ट्री पर बिजली शुल्क की भारी-भरकम बढ़ोतरी को हाईकोर्ट ने अवैध और वैधानिक प्रावधानों के खिलाफ बताया है. यही नहीं, अदालत ने राज्य सरकार पर सख्ती दिखाते हुए स्टोन क्रशर्स से वसूले गए अतिरिक्त बिजली शुल्क को रिफंड करने के आदेश जारी किए हैं.
हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्टोन क्रशर्स पर बिजली शुल्क को 11 फीसदी से बढ़ाकर 37.50 फीसदी किए जाने को लेकर अदालत के समक्ष आए मामले में सुनवाई की. खंडपीठ ने इस शुल्क बढ़ोतरी पर राज्य सरकार और हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड को निर्देश जारी किए कि मामले में याचिका दाखिल करने वाले उद्योगपतियों से दबाव में वसूला गया अतिरिक्त शुल्क रिफंड करे. अदालत ने विकल्प दिया कि या तो शुल्क रिफंड किया जाए या फिर रकम को आगामी बिलों में समायोजित किया जाए.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में स्टोन क्रशर कारोबार से जुड़े लोगों ने एक याचिका दाखिल की थी. हाईकोर्ट में कुल 140 से अधिक याचिकाकर्ताओं ने ये मामला अदालत के समक्ष लाया कि सरकार ने बिजली शुल्क में भारी बढ़ोतरी की है. हिमाचल हाईकोर्ट ने मैसर्स ब्रजेश स्टोन क्रशर व अन्यों की अपील को स्वीकार करते हुए बिजली विभाग की तरफ से सितंबर 2023 व 18 जनवरी 2024 की दोनों अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया.
अदालत ने कानून की व्याख्या करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश बिजली (शुल्क) अधिनियम, 2009′ की धारा 11(2) के तहत राज्य सरकार को किसी भी एक समय पर मूल दर के पचास प्रतिशत से अधिक शुल्क बढ़ाने का अधिकार नहीं है. वर्ष 2017 से तय 11 प्रतिशत की शुल्क दर को देखते हुए सरकार इसे अधिकतम 16.5 प्रतिशत तक ही बढ़ा सकती थी, लेकिन सरकार ने इसे सीधे 25 फीसदी व फिर 37.50 फीसदी कर दिया. यह विधायी शक्तियों का दुरुपयोग ही था.
हाईकोर्ट ने सरकार के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें स्टोन क्रशर्स को पर्यावरणीय प्रभाव और अत्यधिक खपत के नाम पर अन्य बड़े उद्योगों से अलग किया गया था. खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार के पास अधिनियम की धारा 3 के मूल वर्गीकरण को बदलने या स्टोन क्रशर्स का नया उप-वर्ग बनाकर भेदभाव करने का अधिकार नहीं है. अदालत ने माना कि बिजली उपभोक्ताओं के वर्गीकरण और उनके नियम तय करने की विधायी शक्ति विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत केवल हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग के पास है.
स्टोन क्रशर्स संचालको को राहत
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के इस फैसले से राज्य के करीब-करीब ठप पड़े स्टोन क्रशर उद्योगों और खनन इकाइयों को बड़ी राहत मिली है. स्टोन क्रशर्स संचालकों को इससे भारी वित्तीय राहत होगी. हाईकोर्ट ने बिजली बोर्ड को आदेश दिया है कि वे केवल कानून सम्मत दरों (अधिकतम 16.5 फीसदी) पर ही बिजली शुल्क की गणना करें और अधिसूचना की तारीख से लेकर अब तक वसूले गए करोड़ों रुपये के अतिरिक्त राजस्व का मिलान कर याचिकाकर्ताओं को राहत प्रदान करें. याचिकाकर्ता स्टोन क्रशर मालिकों की दलील थी कि ये शुल्क बहुत अधिक है. अदालत ने भी इसे वैधानिक प्रावधानों के खिलाफ बताया.
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार के पास अधिनियम की धारा 3 के मूल वर्गीकरण को बदलने या स्टोन क्रशर्स का नया उप-वर्ग बनाकर भेदभाव करने का अधिकार नहीं है. अदालत ने माना कि बिजली उपभोक्ताओं के वर्गीकरण और उनके नियम तय करने की विधायी शक्ति विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत केवल हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग के पास है.











