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हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित स्कॉलरशिप घोटाले में हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी सीबीआई से ताजा स्टेट्स रिपोर्ट तलब की है. ये स्कॉलरशिप घोटाला 250 करोड़ रुपए से अधिक का है. हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्टेट्स रिपोर्ट में घोटाले को लेकर दाखिल की गई चार्जशीट की संख्या सहित जरूरी विवरण देने के आदेश जारी किए.
हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी सीबीआई ने अदालत को बताया कि घोटाले की जांच पूरी कर ली गई है और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई है. इस पर हाईकोर्ट ने सीबीआई से ताजा स्टेट्स रिपोर्ट तलब करते हुए मामले पर अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित करने के आदेश जारी किए.
मामले में जांच एजेंसी सीबीआई को छानबीन में पता चला है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों सहित निजी शिक्षण संस्थानों में मेधावी छात्रों की स्कॉलरशिप की रकम को हड़पने के लिए बाकायदा एक रैकेट चल रहा था. इसके लिए अधिकारी निजी शिक्षण संस्थानों को स्कॉलरशिप जारी करने के लिए दस फीसदी तक कमीशन लेते थे. याचिका में संलग्न सूचनाओं के अनुसार जांच में पता चला है कि कमीशन का यह खेल होटलों में चलता था. यहां पर स्कॉलरशिप जारी कराने की एवज में निजी संस्थान शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कमीशन का पैसा देते थे.
सीबीआई की जांच में पता चला था कि स्कॉलरशिप की स्वीकृति से संबंधित फाइलों को शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंचने ही नहीं दिया जाता था. निचले स्तर के अधिकारी व कर्मचारी मिलकर फाइलों को अपने स्तर पर ही मार्क कर देते थे. जांच में यह भी पता चला है कि नियमों के खिलाफ निजी ई-मेल आईडी से छात्रवृत्ति जारी करने के काम को अंजाम दिया जाता था.
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में दलालों ने कागजों में हेराफेरी करके करीबन 2.38 लाख मेधावी बच्चों का हक छीन लिया था. ये घोटाला 250 करोड़ रुपए से 266 करोड़ रुपए तक का बताया गया. इस रकम में से 256 करोड़ रुपए निजी संस्थानों को जारी किए गए और दस करोड़ रुपए सरकारी संस्थानों को दिए गए थे. ऐसे में घोटाले का आकार 250 करोड़ से 266 करोड़ रुपए तक का था. हिमाचल में ये घोटाला 2013 से चल रहा था. आशंका जताई गई थी कि ये 2009 से जारी था, लेकिन खुलासा 2013 में हुआ था. हैरत की बात है कि कैग ने 2014 की अपनी रिपोर्ट में घोटाले का संकेत दिया था, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली.
यहां बता दें कि राज्य व केंद्र की सरकारें मेधावी बच्चों के लिए कई तरह की स्कॉलरशिप देती हैं. वर्ष 2013 से पहले स्कॉलरशिप देने की प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं थी, ऐसे में उस समय के घोटाले को पकड़ना आसान नहीं था. केंद्र व राज्य की सरकारें बीस से अधिक स्कॉलरशिप स्कीम्स चलाती हैं. इनमें ट्राइबल स्टूडेंट्स को भी राहत मिलती है. हिमाचल में दलालों ने पात्र छात्रों तक स्कॉलरशिप पहुंचने ही नहीं दी और बीच में ही करोड़ों रुपए की रकम फर्जीवाड़े के तहत गोल कर गए.
मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली सरकार ने 2019 में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी. सुस्त जांच को लेकर हाईकोर्ट ने कई बार सीबीआई को फटकार भी लगाई थी. मामले में ईडी ने भी जांच की है. मुख्य आरोपी को बाद में जमानत भी मिल गई थी. अब सीबीआई का कहना है कि जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी गई है. इस पर हाईकोर्ट ने सीबीआई से ताजा स्टेट्स रिपोर्ट तलब की है.









